टीएमसी को झटका, पश्चिम बंगाल के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने इस्तीफा सौंपा

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर इस समय भारी सियासी संकट खड़ा हो गया है। पार्टी के भीतर मची इस बड़ी उथल-पुथल के बीच राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने आज संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले से पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है।

एक हफ्ते में तीन बड़े इस्तीफे

प्रकाश चिक बराइक से पहले टीएमसी के दो और कद्दावर राज्यसभा सांसद— सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव भी संसद से इस्तीफा दे चुके हैं। एक के बाद एक हुए इन तीन बड़े इस्तीफों के कारण राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की ताकत काफी कम हो गई है। प्रकाश चिक बराइक के जाने के बाद अब उच्च सदन में टीएमसी के सांसदों की संख्या घटकर केवल 10 रह गई है।

आगे और गहरा सकता है संकट

राजनीतिक गलियारों और सूत्रों से मिल रही खबरों के अनुसार, टीएमसी के भीतर का यह असंतोष यहीं रुकने वाला नहीं है। कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले एक हफ्ते के भीतर पार्टी के तीन और राज्यसभा सांसद अपने पदों से इस्तीफा दे सकते हैं। अगर ये अटकलें भी सच साबित हुईं, तो संसद में ममता बनर्जी की पार्टी का ग्राफ और ज्यादा नीचे गिर जाएगा। हालांकि, इन इस्तीफों की मुख्य वजह क्या है, इसका अभी पूरी तरह खुलासा नहीं हो पाया है, लेकिन विपक्षी दल इसे टीएमसी की अंदरूनी कलह और असंतोष का नतीजा बता रहे हैं।

नेताओं ने इस्तीफे को बताया निजी फैसला

इस हफ्ते पार्टी छोड़ने वाले बराइक तीसरे सांसद हैं। इससे पहले बुधवार को राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने संसद और पार्टी दोनों छोड़ दी थी। साल 2021 में कांग्रेस छोड़कर टीएमसी में आईं सुष्मिता देव ने अपने इस्तीफे को पूरी तरह से निजी फैसला बताया है। उन्होंने अपने भविष्य के राजनीतिक प्लान को लेकर चल रही अटकलों पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इनसे ठीक पहले सीनियर नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने सबसे पहले राज्यसभा और पार्टी से इस्तीफा देकर इस सिलसिले की शुरुआत की थी।

विधानसभा से लेकर संसद तक बगावत

प्रकाश चिक बराइक का यह इस्तीफा ऐसे समय पर आया है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद से टीएमसी के भीतर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। पिछले हफ्ते ही पार्टी के दो-तिहाई से ज्यादा विधायकों (80 में से 65) ने आधिकारिक टीएमसी विधानमंडल दल से नाता तोड़ लिया था और विधानसभा में 'ऋतब्रत बनर्जी' के नेतृत्व में मुख्य विपक्षी गुट के तौर पर मान्यता हासिल कर ली थी। इस बागी गुट का दावा है कि उनकी ताकत लगातार बढ़ती जा रही है।

अब यह संकट राज्य की विधानसभा से निकलकर सीधे संसद तक पहुंच गया है। संसद में काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में बागी सांसदों ने 20 से ज्यादा लोकसभा सदस्यों के समर्थन का दावा किया है। इस बीच जादवपुर की सांसद सायनी घोष और कोलकाता दक्षिण की सांसद माला रॉय भी इन बागी सांसदों के गुट में शामिल हो गई हैं, जिससे ममता बनर्जी की मुश्किलें लगातार बढ़ती दिख रही हैं।

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