चांदी 45% तक टूटी: क्या अब भी जारी रहेगा गिरावट का सिलसिला?

मुंबई। इस वर्ष 29 जनवरी को 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुंचने वाली चांदी बीते चार महीनों में भारी गिरावट का शिकार हुई है। 11 जून को इसकी कीमत घटकर 2,30,493 रुपये पर आ गई है, जो इसके ऊपरी स्तरों से लगभग 45 प्रतिशत की बड़ी गिरावट को दर्शाती है। बाजार के इस बड़े उतार-चढ़ाव ने आम निवेशकों और ट्रेडर्स को असमंजस में डाल दिया है कि वे इस मंदी को खरीदारी के एक बेहतरीन अवसर के रूप में देखें या फिर फिलहाल कमोडिटी बाजार से दूरी बना लें।
केडिया एडवाइजरी की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, चांदी की कीमतों में आ रही इस गिरावट का दौर अभी थमने वाला नहीं है। वैश्विक बाजार में चांदी 50 डॉलर प्रति औंस के मुख्य मनोवैज्ञानिक स्तर को नीचे की ओर तोड़कर 48.60 डॉलर प्रति औंस तक लुढ़क सकती है। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे हालात बनते हैं, तो भारतीय घरेलू बाजार में चांदी की कीमत घटकर 1.60 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक पहुंच सकती है।
डॉलर इंडेक्स और गोल्ड-सिल्वर रेश्यो का दबाव
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक मंच पर डॉलर इंडेक्स लगातार मजबूत हो रहा है, जिसका सीधा नकारात्मक असर चांदी जैसी कीमती धातुओं पर पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, गोल्ड-सिल्वर रेश्यो का बढ़ना भी चांदी की कमजोरी की एक मुख्य वजह है। साल 2025 के मध्य में जब यह रेश्यो 107 के स्तर पर था, तब चांदी के दाम काफी धीमे थे। इसके बाद जब यह अनुपात घटकर 43 पर आया, तो चांदी की कीमतों ने 4.20 लाख रुपये का आंकड़ा पार कर लिया था। वर्तमान में यह रेश्यो दोबारा बढ़कर 63 पर पहुंच गया है और अगले तीन महीनों में इसके 72 के स्तर तक जाने का अनुमान है। इस घटती कीमतों के असर से सिल्वर ईटीएफ में निवेशकों का भरोसा डिगा है और फरवरी महीने से इसमें से लगातार पैसा निकाला जा रहा है। मई के दौरान निवेशकों ने ईटीएफ से अब तक की सबसे बड़ी 2,133 करोड़ रुपये की निकासी की, जबकि इसके विपरीत जनवरी में इसमें 9,463 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश देखा गया था।
एक्सपर्ट्स की राय और निवेश की रणनीति
कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार, मध्यम अवधि के लिए चांदी का रुझान अभी मंदी की तरफ ही दिखाई दे रहा है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में 61 डॉलर का महत्वपूर्ण स्तर नीचे की ओर टूट जाता है, तो इसके भाव घटकर 56 से 57 डॉलर प्रति औंस तक आ सकते हैं। इसके बावजूद, लंबी अवधि के लिए चांदी का भविष्य काफी उज्ज्वल और सकारात्मक नजर आ रहा है, इसलिए निवेशकों को इस गिरावट के दौर में धीरे-धीरे और किश्तों में निवेश करने की रणनीति अपनानी चाहिए।
भविष्य का आउटलुक और तकनीकी स्तर
एसएस वेल्थस्ट्रीट के तकनीकी विश्लेषण के मुताबिक, बाजार में वर्तमान में देखी जा रही मामूली बढ़त केवल एक अस्थाई सुधार है। चांदी में किसी भी नई और बड़ी ऐतिहासिक तेजी की शुरुआत तब तक संभव नहीं है, जब तक कि इसके दाम घरेलू बाजार में क्लोजिंग आधार पर 2,87,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को पार नहीं कर जाते। तब तक बाजार में इसी तरह का उतार-चढ़ाव बना रहेगा। वैश्विक बाजार के मंथली टाइम फ्रेम पर 64 डॉलर का एक मजबूत सपोर्ट स्तर था, जिसे तोड़ने के बाद चांदी ने 61 डॉलर के स्तर को छुआ है। अब जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में 61 डॉलर का यह निचला स्तर सुरक्षित है, तब तक किसी और बड़ी गिरावट की आशंका काफी कम है।
