TMC में बड़ा राजनीतिक संकट, 19 सांसदों के हस्ताक्षर वाला पत्र सामने आया

कोलकाता:पश्चिम बंगाल के हालिया विधानसभा चुनाव में शिकस्त झेलने के बाद अब ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) गहरे आंतरिक संकट में घिर गई है और पार्टी में एक बड़ा ऊर्ध्वाधर विभाजन (वर्टिकल स्प्लिट) लगभग तय माना जा रहा है। राज्य विधानसभा के 80 में से 58 विधायकों की खुली बगावत के बाद, अब लोकसभा के भी 19 बागी सांसदों का एक संयुक्त पत्र शुक्रवार को सार्वजनिक हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह पत्र बीती 18 मई को ही लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय को सौंप दिया गया था, जिसमें सांसदों ने सदन के भीतर अपने लिए एक अलग विधायी गुट को मान्यता देने की मांग की है।

इस बड़े घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि चुनावी नतीजों के महज दो हफ्ते के भीतर ही पार्टी के भीतर विद्रोह की स्क्रिप्ट लिख दी गई थी। इस बागी गुट में पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान, सायोनी घोष, काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय जैसे तृणमूल कांग्रेस के कई बेहद चर्चित और बड़े चेहरे शामिल हैं।

संसद और विधानसभा दोनों जगह दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा पार

देश के सख्त दल-बदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची) के तहत किसी भी राजनीतिक दल के बागी धड़े को सदन में अलग गुट या मान्यता तभी मिल सकती है, जब उस पार्टी के कम से कम दो-तिहाई (2/3) निर्वाचित सदस्य बगावत के पक्ष में हों। तृणमूल कांग्रेस के वर्तमान संकट में बागियों के पास दोनों ही जगहों पर यह जरूरी जादुई आंकड़ा मौजूद है:

  • पश्चिम बंगाल विधानसभा: विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 80 सीटें जीती थीं, जिनमें से 58 विधायक पहले ही 3 जून को विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर अलग गुट की मान्यता पा चुके हैं, जो दो-तिहाई से कहीं अधिक है।

  • लोकसभा: संसद के निचले सदन में पार्टी के कुल 28 सांसद निर्वाचित हुए थे, जिनमें से 19 (और कुछ अन्य रिपोर्टों के अनुसार 20) सांसदों ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है। इस तरह लोकसभा में भी बागियों के पास दो-तिहाई से ज्यादा का मजबूत बहुमत है।

इस नियम के तहत बागी सांसद किसी अन्य दल में विलय कर सकते हैं या फिर संसद में एक अलग स्वतंत्र ब्लॉक बनाकर काम कर सकते हैं। हालांकि, ममता बनर्जी का वफादार गुट इस पूरी प्रक्रिया और कानूनी पेचिदगियों को देश की शीर्ष अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है।

काकोली घोष दस्तीदार के हाथों में कमान, एनडीए को समर्थन देने की तैयारी

संसद के भीतर इस विद्रोह का मुख्य चेहरा वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार बनकर उभरी हैं। बागी सांसदों की ओर से लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में उनके नेतृत्व में ही नया संसदीय ब्लॉक बनाने की बात कही गई है। बागी खेमे से जुड़े सूत्रों का कहना है कि वे फिलहाल औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल नहीं हो रहे हैं, बल्कि सदन के भीतर एक अलग गुट के रूप में रहकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार को अपना बाहर से समर्थन देंगे। इस रणनीति के पीछे मुख्य उद्देश्य कानूनी रूप से अपनी सदस्यता को पूरी तरह सुरक्षित रखना है।

ममता बनर्जी के खेमे में बचे अब मुट्ठी भर विधायक और सांसद

इस अभूतपूर्व राजनैतिक म्यूटिनी (विद्रोह) ने तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को पूरी तरह अलग-थलग कर दिया है। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो लोकसभा में पार्टी के 28 सांसदों में से 19 के अलग होने के बाद ममता बनर्जी के प्रति वफादार सांसदों की संख्या घटकर अब दहाई के आंकड़े से भी कम यानी महज 9 रह गई है। वहीं, राज्यसभा में भी 13 में से 4 सांसदों के इस्तीफे के बाद अब सिर्फ 9 सांसद ही बचे हैं। सबसे बड़ा झटका राज्य स्तर पर लगा है, जहां 80 विधायकों वाली मजबूत पार्टी के विभाजन के बाद ममता बनर्जी के खेमे में अब केवल 22 विधायक ही शेष बचे हैं, जिससे पार्टी का रसूख केंद्र और राज्य दोनों जगहों पर बेहद कमजोर हो गया है।

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