क्या आप जानते हैं अंजनी पुत्र बजरंगबली का असली नाम? जानें कैसे पड़ा उनका नाम ‘हनुमान

अंजनी पुत्र बजरंगबली को हम सब प्यार से हनुमानजी के नाम से जानते हैं, लेकिन क्या आप उनके असली नाम और उसके पीछे की रोचक कहानी जानते हैं? प्राचीन ग्रंथों में उनके नाम, स्वरूप और पराक्रम से जुड़ी कई कथाएं मिलती हैं. यहां जानिए कैसे उन्हें हनुमान नाम मिला और इस नाम के पीछे क्या विशेष अर्थ छिपा है…

 क्या आपने कभी सोचा है कि जिस रामभक्त हनुमान का नाम को आप सालों से जपते आ रहे हैं, वह उनका असली नाम नहीं है? यह सुनकर आपको हैरानी हो सकती है, यकीन करना भी मुश्किल लगे. लेकिन यह पूरी तरह सच है. प्राचीन परंपराओं में देवी-देवताओं के नाम कभी भी यूं ही नहीं रखे जाते थे, ये घटनाओं, अनुभवों और बदलावों से बनते थे. हर नाम के पीछे एक कहानी होती थी. जैसे मां दुर्गा ने महिषासुर का अंत किया था तो मां का एक नाम महिषासुरमर्दिनी पड़ गया. भगवान कृष्ण बंसी बजाते थे तो उनको बंसीवाला कहा गया. वैसे ही एक घटना से प्रेरित होकर वीर बजरंगबली को हनुमान कहा गया. आइए जानते हैं आखिर अंजनी पुत्र केसरी नंदन का असली नाम क्या है और हनुमान का नाम कैसे पड़ गया.
हनुमान नाम में छुपा अर्थ – हनुमान नाम संस्कृत के शब्द हनु से आया है, जिसका अर्थ है ठोड़ी या जबड़ा. यह नाम उनके बचपन की एक खास घटना से जुड़ा हुआ है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार बाल हनुमान ने सूर्य को फल समझकर खाने के लिए छलांग लगा दी थी. इस पर देवराज इंद्र ने उन पर वज्र से प्रहार कर दिया, जिससे अंजनी पुत्र का जबड़ा घायल हो गया. यही घटना उनकी कहानी का अहम मोड़ बन गई और तभी से अंजनी पुत्र को हनुमान यानी 'चिन्हित जबड़े वाला' कहा जाने लगा.

बचपन की घटना जिसने सब कुछ बदल दिया – बचपन में हनुमानजी की जिज्ञासा की कोई सीमा नहीं थी. चमकते सूर्य को देखकर उन्होंने उसे पका हुआ फल समझा और उसकी ओर छलांग लगा दी. यह सिर्फ एक खेल नहीं था, बल्कि उनकी अपार शक्ति को भी दिखाता था. लेकिन जब इंद्र ने हस्तक्षेप किया, तो उनके प्रहार से हनुमानजी बेहोश हो गए. इस घटना से सभी देवता चौंक गए, आखिर इंद्र के प्रहार से कोई बालक केवल बेहोश कैसे हो सकता है, इस घटना के बाद सभी ने अंजनी पुत्र की दिव्य क्षमता को पहचाना.

चोट से अपार शक्ति तक – इस घटना के बाद देवताओं ने हनुमानजी को अद्भुत वरदान दिए. उन्होंने सुनिश्चित किया कि हनुमानजी को भविष्य में किसी भी अस्त्र-शस्त्र से कोई नुकसान ना हो और वे अपार शक्ति से भर जाएं. इसी वजह से हनुमानजी को बजरंगबली भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है वज्र के समान शरीर वाला.

यह है हनुमानजी का असली नाम – हनुमानजी के कई नाम हैं, जो उनकी अलग-अलग पहचान को दर्शाते हैं. अंजनी के पुत्र होने के कारण उन्हें अंजनेय कहा जाता है, पवनदेव के पुत्र होने की वजह से उनको पवनपुत्र भी कहा जाता है. बजरंगबली के रूप में वे शक्ति के प्रतीक हैं. लेकिन एक नाम सबसे खास है और वह है सुंदर. पौराणिक कथाओं के अनुसार, हनुमानजी का बचपन का वास्तविक नाम सुंदर था, जिसे उनकी माता अंजना ने दिया था. हनुमानजी को बचपन में पवन के देवता मरुत के पुत्र होने के कारण मारुति भी कहा जाता था.

रामायण का महत्वपूर्ण हिस्सा सुंदरकांड – सुंदर कांड रामायण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. इसमें हनुमानजी की यात्रा, साहस और भक्ति को दर्शाया गया है. सुंदर शब्द का अर्थ सिर्फ दिखने में सुंदर नहीं, बल्कि कर्म और भावना में भी सुंदरता है. वह हर काम में सुंदर ही थे, उनके जैसा भक्त दुनिया में कोई नहीं, उनके जैसे वीर दुनिया में कोई नहीं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगलवार और शनिवार के दिन सुंदरकांड का पाठ करने से जीवन में कभी कोई कष्ट नहीं होता है और सभी ग्रह दोष, बुरी नजर समेत सभी नकारात्मक चीजों से केवल इस पाठ को करने से मुक्ति मिलती है.

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