छात्र संवाद से पहले राजनीतिक घमासान, गहलोत का बड़ा बयान

जयपुर। राजस्थान की राजनीति में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया, जब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आगामी कोटा दौरे को लेकर राज्य की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। गहलोत का दावा है कि जिला प्रशासन कोटा में छात्रों के साथ होने वाले राहुल गांधी के संवाद कार्यक्रम के होर्डिंग्स और प्रचार सामग्री को जबरन हटा रहा है।
बीजेपी सरकार पर घबराहट का आरोप
अशोक गहलोत ने वर्तमान सरकार के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि जब राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी, तब विपक्षी दलों के कार्यक्रमों के प्रति प्रशासन हमेशा सहयोग का रुख रखता था। लेकिन आज भाजपा सरकार राहुल गांधी के इस कार्यक्रम से इतनी घबरा गई है कि प्रशासनिक स्तर पर इसके प्रचार-प्रसार को रोकने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सिर्फ होर्डिंग्स ही नहीं हटाए जा रहे, बल्कि कोटा के कोचिंग संस्थानों पर भी दबाव बनाया जा रहा है ताकि छात्र इस कार्यक्रम का हिस्सा न बनें। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ और छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास बताया।
बाधाओं के बावजूद भारी उत्साह का दावा
तमाम प्रशासनिक अड़चनों के आरोपों के बीच, पूर्व मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया है कि बड़ी संख्या में छात्र इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं और विद्यार्थियों के मुद्दों को लेकर लोगों में भारी उत्साह है और प्रशासन की कोई भी कार्रवाई छात्रों को आने से नहीं रोक पाएगी।
कोटा से 'छात्रों की गूंज' अभियान की शुरुआत
दरअसल, कांग्रेस पार्टी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर देशव्यापी 'छात्र संवाद अभियान' शुरू करने जा रही है। इस अभियान के पहले बड़े कार्यक्रम के लिए देश की कोचिंग राजधानी कहे जाने वाले कोटा शहर को चुना गया है।
कार्यक्रम की रूपरेखा और मुख्य मुद्दे
कोटा के दशहरा मैदान में स्थित श्रीराम रंगमंच पर ‘छात्रों की गूंज’ नाम से इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें लगभग 10 हजार छात्रों को जुटाने का लक्ष्य है। कांग्रेस के मुताबिक, राहुल गांधी शाम 5 बजे से रात 9:30 बजे तक सीधे तौर पर विद्यार्थियों के बीच मौजूद रहेंगे। इस मैराथन संवाद के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, युवाओं का भविष्य, रोजगार के अवसर और बेहतर शिक्षा व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर खुलकर चर्चा की जाएगी। हालांकि, आयोजन से पहले ही शुरू हुई इस सियासी बयानबाजी ने राजस्थान का राजनीतिक पारा गरमा दिया है।
