कंबल में लपेटकर बोरे में फेंका शव, ब्लाइंड मर्डर केस में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस के विशेष जांच दल ने तकरीबन ढाई महीने पुराने एक बेहद पेचीदा और सनसनीखेज 'ब्लाइंड मर्डर केस' (अंधे कत्ल) की गुत्थी को सुलझाते हुए मृतक के सगे भाई और उसकी पत्नी (भाभी) को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। खौफनाक वारदात को अंजाम देने के बाद शव को कई कंबलों में लपेटकर एक बड़े प्लास्टिक के बोरे में ठूंसा गया और रामा रोड पर स्थित एक बंद पड़ी फैक्ट्री के मुख्य द्वार के समीप लावारिस फेंक दिया गया था। पुलिस की विशेष विंग द्वारा की गई लंबी वैज्ञानिक तफ्तीश, आधुनिक टेक्निकल सर्विलांस और प्रक्षेत्र के सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की कड़ियों को आपस में जोड़ने के बाद आखिरकार इस खूनी रहस्य से पर्दा उठ ही गया।

लावारिस बोरे से आती दुर्गंध ने खोला कत्ल का राज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट

इस वीभत्स हत्याकांड की शुरुआत बीते 4 अप्रैल को हुई, जब रामा रोड की एक फैक्ट्री के बाहर पड़े एक लावारिस सफेद प्लास्टिक के बोरे से असहनीय और तेज बदबू उठने पर स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचित किया। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने जब बोरे को काटा, तो उसके भीतर दो भारी कंबलों में लिपटा हुआ एक पुरुष का सड़ा-गला शव बरामद हुआ, जिसके दोनों पैरों को एक मोबाइल चार्जर के डेटा केबल (तार) से बेरहमी से बांधा गया था। अमूमन शव के पास से कोई भी ऐसा दस्तावेज, आईडी कार्ड या सुराग नहीं मिला जिससे उसकी शिनाख्त हो सके, जिसके चलते यह मामला पूरी तरह से ब्लाइंड मर्डर में तब्दील हो चुका था। हालांकि, बाद में आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस बात की विधिक पुष्टि कर दी कि मृतक के सिर पर पहले किसी भारी वस्तु से प्रहार किया गया था और फिर गला घोंटकर उसकी जान ली गई थी।

सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की स्कैनिंग, ई-कार्ट चालक से सुराग और लोनी का वह कमरा

इस उलझे हुए मामले को सुलझाने के लिए दिल्ली पुलिस की कई टीमों ने इलाके के करीब 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को खंगाला और शिनाख्त के लिए 200 से ज्यादा 'ह्यू एंड क्राई' (पहचान संबंधी) नोटिस जारी किए। इसी सघन चेकिंग के दौरान कैमरों में एक संदिग्ध ई-कार्ट (इलेक्ट्रिक ठेला) दिखाई दिया, जिसका उपयोग आधी रात को उस भारी बोरे को ठिकाने लगाने के लिए किया गया था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उस ई-कार्ट के चालक और उस पर काम करने वाले मजदूरों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसके बाद पुलिस गाजियाबाद के लोनी स्थित उस किराए के मकान तक पहुंचने में कामयाब रही जहां इस पूरी वारदात को अंजाम दिया गया था। जब पुलिस ने बंद पड़े उस मकान का ताला तोड़कर फॉरेंसिक टीम के साथ तलाशी ली, तो वहां फर्श और दीवारों पर खून के कड़े धब्बे व अन्य फोरेंसिक साक्ष्य मिले। पड़ताल में सामने आया कि उस कमरे में मृतक अमित कुमार अपने छोटे भाई गोपाल और उसकी पत्नी सोमा उर्फ सीमा के साथ रहता था, जो हत्या के तुरंत बाद कमरा खाली कर अचानक गायब हो गए थे।

चार राज्यों की खाक छानने के बाद दबोचे गए हत्यारोपी और वारदात के पीछे की मुख्य वजह

फरार दंपती की धरपकड़ के लिए पुलिस ने दिल्ली समेत हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे चार राज्यों के संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। आखिरकार, मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) के तकनीकी विश्लेषण की मदद से पुलिस ने 15 जून को दोनों आरोपियों को रामा रोड के पास स्थित शिव बस्ती इलाके से घेरकर दबोच लिया। पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने कबूला कि मृतक अमित कुमार अत्यधिक शराब पीने का आदी था और वह अक्सर अपने सगे छोटे भाई की अनुपस्थिति में उसकी पत्नी सोमा के साथ बेहद आपत्तिजनक, अवांछित व्यवहार और शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालता था। घर में रोज-रोज होने वाले इसी शर्मनाक विवाद, मानसिक तनाव और बदनामी के डर से तंग आकर गोपाल और सोमा ने मिलकर अमित को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रची और सोते समय उसकी जीवनलीला समाप्त कर दी। फिलहाल पुलिस हत्या में प्रयुक्त अन्य साक्ष्यों को बटोरने के लिए मुख्य आरोपी गोपाल को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है, जबकि उसकी पत्नी को जेल भेज दिया गया है।

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