राज्यपाल ने जयंती पर महाराणा प्रताप को श्रद्धा नमन कर आदर्शो से प्रेरणा लेने का किया आह्वान

जयपुर: राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने राजभवन (लोकभवन) परिसर में स्थापित मेवाड़ के गौरव वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की भव्य प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस प्रतिमा में महान योद्धा महाराणा प्रताप अपने सबसे प्रिय और वफादार घोड़े 'चेतक' के साथ एक विशाल चट्टान पर बैठे हुए दिखाई देते हैं। पुष्पांजलि कार्यक्रम के दौरान राजभवन के अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।

अदम्य साहस और मातृभूमि की रक्षा के प्रतीक थे महाराणा प्रताप

इस गरिमामयी अवसर पर संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि महाराणा प्रताप केवल एक राजा नहीं, बल्कि अदम्य साहस, अप्रतिम वीरता और देशभक्ति के जीते-जागते प्रतीक थे। वे मातृभूमि के सच्चे रक्षक थे, जिन्होंने विषम परिस्थितियों में भी कभी हार नहीं मानी। राज्यपाल ने उनके संघर्षों को याद करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप का नाम इतिहास के पन्नों में सदा के लिए अमर है और उनका व्यक्तित्व हर पीढ़ी को राष्ट्र प्रथम की भावना सिखाता है।

माँ भारती के गौरव के लिए राज-पाठ का परित्याग और मुगलों से संघर्ष

राज्यपाल ने महाराणा प्रताप के ऐतिहासिक बलिदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि माँ भारती के मान-सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए उन्होंने महलों के सुख-आराम और राज-पाठ को हंसते-हंसते छोड़ दिया। उन्होंने घास की रोटियां खाना स्वीकार किया, लेकिन विदेशी आक्रांताओं के सामने कभी अपना सिर नहीं झुकाया। अपने दृढ़ संकल्प और छापामार युद्ध नीति के बल पर उन्होंने मुगलों को मेवाड़ की धरती से खदेड़ दिया और देश की आजादी की अलख जगाए रखी।

महापुरुष के जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण का आह्वान

भाषण के समापन पर राज्यपाल ने देश के नागरिकों, विशेषकर युवाओं से महाराणा प्रताप के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके राष्ट्रप्रेम से प्रेरणा लें। राज्यपाल ने सभी से एकजुट होकर देश की उन्नति, संप्रभुता और माँ भारती के सर्वांगीण विकास के लिए मिलकर पूरी निष्ठा के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

Leave a Reply