अमेरिका-ईरान डील का दावा: मसौदे की 14 शर्तें सामने आने की बात

पेरिस: पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी सैन्य तनाव को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और बड़ा कदम उठाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते के अंतरिम मसौदे (MoU) को अपनी मंजूरी देते हुए इस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। एक अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारी के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार शाम फ्रांस के ऐतिहासिक वर्साय पैलेस में आयोजित एक रात्रिभोज के दौरान इस दस्तावेज पर आधिकारिक रूप से दस्तखत किए।

इससे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी पक्ष की ओर से मोहम्मद बाकेर गालिबाफ भी इस कूटनीतिक दस्तावेज पर अपनी सहमति दे चुके थे। दोनों शीर्ष राष्ट्रपतियों के हस्ताक्षरों के बाद अब यह शांति समझौता तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। हालांकि, ईरान ने साफ किया है कि इस अंतरिम समझौते के बाद भी स्विट्जरलैंड के जेनेवा में दोनों देशों के बीच होने वाली आगामी बैठक अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही आयोजित की जाएगी।

समझौते की वो 14 प्रमुख शर्तें जिन पर बनी सहमति

गोपनीयता के लंबे दौर के बाद अब इस महत्वपूर्ण समझौते का 14 सूत्रीय मसौदा सबके सामने आ चुका है, जिसकी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  1. युद्ध की तत्काल समाप्ति: अमेरिका, ईरान और इस जंग में शामिल उनके सभी सहयोगी देश लेबनान सहित तमाम मोर्चों पर अपने सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से रोक देंगे।

  2. संप्रभुता का सम्मान: दोनों देश अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का पूरा सम्मान करेंगे और आंतरिक मामलों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं करेंगे।

  3. 60 दिनों की समय-सीमा: दोनों देश इस अंतरिम समझौते के लागू होने के अधिकतम 60 दिनों के भीतर एक अंतिम और स्थायी समझौते पर पहुंचने के लिए बातचीत पूरी करेंगे। आपसी सहमति से इस अवधि को बढ़ाया भी जा सकेगा।

  4. अमेरिकी नाकेबंदी का खात्मा: इस MoU पर दस्तखत होते ही अमेरिका ईरान पर लगाई गई अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा और 30 दिनों के भीतर इसे पूरी तरह खत्म कर जहाजों की आवाजाही को युद्ध-पूर्व के स्तर पर बहाल कर देगा। अंतिम समझौते के 30 दिनों के भीतर अमेरिका आसपास के क्षेत्रों से अपनी सैन्य मौजूदगी भी हटाएगा।

  5. होर्मुज जलडमरूमध्य का संचालन: ईरान अगले 60 दिनों तक फारस की खाड़ी और ओमान सागर के बीच वाणिज्यिक (व्यापारिक) जहाजों को बिना किसी शुल्क के सुरक्षित मार्ग देगा। तकनीकी बाधाओं और समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाकर 30 दिनों में यातायात सामान्य किया जाएगा। इसके भविष्य के प्रशासन को लेकर ईरान ओमान व अन्य तटीय देशों से बातचीत करेगा।

  6. 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण फंड: अमेरिका अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के आर्थिक विकास और पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर का एक व्यापक प्लान तैयार करेगा। इसके लिए जरूरी वित्तीय लेनदेन, लाइसेंस और छूट अमेरिका द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी।

  7. प्रतिबंधों की पूरी तरह समाप्ति: अमेरिका अंतिम समझौते के तहत तय समय सारणी के अनुसार ईरान पर लगे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, आईएईए (IAEA) और अपने सभी एकतरफा प्राथमिक व द्वितीयक प्रतिबंधों को पूरी तरह समाप्त करने का वचन देता है।

  8. परमाणु कार्यक्रम पर रोक: ईरान ने एक बार फिर दोहराया है कि वह कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। ईरान के पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम को आईएईए की देखरेख में वहीं नष्ट किया जाएगा और अंतिम फैसला होने तक वह अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे नहीं बढ़ाएगा।

  9. यथास्थिति बनाए रखना: अंतिम और स्थायी समझौता होने तक दोनों देश मौजूदा स्थिति (स्टेटस को) बनाए रखेंगे; यानी ईरान परमाणु कार्यक्रम में बदलाव नहीं करेगा और अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा और न ही क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिक तैनात करेगा।

  10. तेल निर्यात के लिए तत्काल छूट: जब तक प्रतिबंध पूरी तरह नहीं हट जाते, तब तक अमेरिकी वित्त मंत्रालय ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात, बैंकिंग, बीमा और परिवहन सेवाओं के लिए तत्काल आवश्यक छूट (वेवर्स) जारी करेगा।

  11. जब्त फंड की वापसी: अमेरिका द्वारा रोकी गई या जब्त की गई ईरान की संपत्तियों और फंड को वापस लौटाया जाएगा, जिसका उपयोग ईरान का केंद्रीय बैंक अपनी जरूरत के भुगतानों के लिए कर सकेगा।

  12. कार्यकारी तंत्र की स्थापना: इस अंतरिम समझौते के सफल क्रियान्वयन और भविष्य के अंतिम समझौते की कड़ी निगरानी के लिए दोनों देश मिलकर एक संयुक्त कार्यकारी तंत्र का गठन करेंगे।

  13. शेष मुद्दों पर विशेष वार्ता: युद्ध विराम, नाकेबंदी हटाने, तेल निर्यात और फंड जारी होने से जुड़े मुख्य नियमों के लागू होने के साथ ही दोनों देश बाकी बचे अन्य प्रावधानों पर अपनी विशेष वार्ता को जारी रखेंगे।

  14. यूएन सुरक्षा परिषद की मुहर: इस पूरे शांति समझौते को और अधिक कानूनी व बाध्यकारी बनाने के लिए अंत में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक विशेष प्रस्ताव के माध्यम से वैश्विक समर्थन दिया जाएगा।

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