सिरोही का अनोखा मंदिर! अयोध्या जैसा लगा है 21 क्विंटल का घंटा, 2 किमी तक गूंजती है ध्वनि

मंदिरों में घंटी लगाने का विशेज महत्व होता हैं. घंटी नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर अध्यात्मिक शक्ति को एकाग्र करने का काम करती हैं. आज हम आपको सिरोही जिले के गिरवर गांव के पाटनारायण मंदिर के विशाल गरुड़ घंट के बारे में बताने जा रहे है. यह किसी मंदिर में लगा दूसरा सबसे बड़ा घंटा हैं. सबसे बड़ा घंटा मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर में 37 क्विंटल का लगा हैं. वहीं सिरोही के इस मंदिर में करीब 10 वर्ष पूर्व लगा ये घंटा 21 क्विंटल (2100 किलोग्राम) का हैं.
वहीं बाद में अयोध्या के रामलला मंदिर में भी 21 क्विंटल का घंटा लगाया गया था. पाट नारायण मंदिर में अष्टधातु से बना ये गरुड़ घंट 2 मंजिला इमारत में लगा हुआ हैं. ऊंचाई पर होने से इसकी आवाज 2 किलोमीटर दूर तक सुनाई देती हैं. इसकी फिनिशिंग का कार्य पूरा होने पर इसकी आवाज 10 किलोमीटर दूर तक सुनाई देगी.
भगवान विष्णु के वाहन हैं गरुड़
गरुड़ घंट के अंदर वाले भाग में भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ का प्रतीक चिह्न बना होता है. यहां दर्शन करने आने वाले भक्त इस घंटे को देखने और इसे बजाकर यहां से जाते है. मंदिर के संत सनकादिक शरण महाराज ने बताया की मंदिरों में लगाई जाने वाली घंटी नेगेटिव एनर्जी को दूर करती हैं. इस वजह से यहां इस विशाल गरुड़ घंट को लगाने का निर्णय लिया गया था. इसकी आवाज गिरवर गांव और आसपास तक सुनाई देती है.
नारायण हृदय तीर्थ के रूप में है इतिहास
मंदिर के इतिहास की बात करें तो पाटनारायण मंदिर का इतिहास स्कंद महापुराण में भी मिलता हैं जिसमें इसका नारायण ह्रद तीर्थ’ के नाम से उल्लेख मिलता हैं. यह मंदिर पिछले कई वर्षों से श्री निम्बार्क संप्रदाय के संतों की तपोस्थली रहा है. मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण चक्रवर्ती राजा अंबरीष की पटरानी ने करवाया था. यहाँ भगवान विष्णु की एकाकी प्रतिमा विराजमान है. राजा अंबरीष के वंशज और राजस्थान, गुजरात तथा मध्य प्रदेश के राजा यहां पाटोत्सव मनाया करते थे.
इसी वजह से इस मंदिर का नाम पाट नारायण हो गया. मुगल काल में मंदिर के खंडित होने के बाद महंत सीतारामदास महाराज और बाद में महंत अचलदास महाराज ने इसका जीर्णोद्धार करवाया था. यहां गौशाला, आयुर्वेद औषधालय भी संचालित हो रहा है. मंदिर में दर्शन करने के लिए दूर दराज से भक्त यहां आते हैं.
