फादर्स डे पर देखें ये खास फिल्में, बाप-बेटे के रिश्ते की भावुक दास्तान जीत लेगी दिल

मुंबई। 'पिता सिर्फ एक रिश्ता नहीं है, वह एक अटूट विश्वास होना चाहिए, जो तुम्हें यह भरोसा दिलाए कि यदि संपूर्ण सृष्टि भी तुम्हारे विरोध में आ जाए, तो तुम अकेले डटकर मुकाबला कर सकते हो!' यह बेहद प्रभावशाली संवाद बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान की फिल्म 'जवान' का है, जिसे पर्दे पर अभिनेत्री नयनतारा बोलती हैं। असल जिंदगी में भी यह केवल किसी फिल्म की स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन का परम सत्य है। पिता उस विशाल आसमान की तरह हैं जो तपती धूप में शीतल छांव का अहसास कराते हैं और जीवन के हर कठिन मोड़ पर हमारी सबसे बड़ी ढाल बनते हैं। भारतीय सिनेमा के रचनाकारों ने भी इस पावन और गहरे रिश्ते की संवेदनाओं को समय-समय पर बड़े पर्दे पर बखूबी उकेरा है। आइए नजर डालते हैं पिता और पुत्र के इसी अटूट स्नेह व संघर्ष पर आधारित कुछ बेहतरीन और सदाबहार फिल्मों पर।
आधुनिक सिनेमा में पिता के संघर्ष और रक्षक स्वरूप की गाथाएं
हाल के वर्षों में आई कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों ने पिता-पुत्र के जज्बात को नए कलेवर में दर्शकों के सामने पेश किया है। सनी देओल की 'गदर 2' इसी का एक सटीक उदाहरण है, जहां एक पिता अपने बेटे की जान बचाने के लिए सीमाओं की परवाह न करते हुए दोबारा दुश्मन देश की धरती पर कदम रख देता है। वहीं, सामाजिक विषय पर बनी 'ओएमजी 2' में दिखाया गया है कि जब पूरी दुनिया एक मासूम बच्चे के खिलाफ खड़ी हो जाती है, तब एक पिता समाज की परवाह किए बिना अपने बेटे के मान-सम्मान के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाता है। शाहरुख खान की 'जवान' में भी पिता-पुत्र के रिश्ते का अनोखा पहलू दिखा, जिसमें उनका 'विक्रम राठौड़' का किरदार और 'बेटे को हाथ लगाने से पहले बाप से बात कर' जैसा दमदार संवाद दर्शकों के दिलों में उतर गया। इसके अतिरिक्त, सलमान खान की 'टाइगर 3' में देशप्रेम और पितृत्व का अद्भुत संगम दिखा, तो रणबीर कपूर और अनिल कपूर अभिनीत 'एनिमल' ने एक सख्त पिता और उसके प्रति बेटे के जुनूनी व पजेसिव प्यार की एक बेहद जटिल और भावुक कहानी बॉक्स ऑफिस पर पेश की।
अमिताभ बच्चन की बेमिसाल केमिस्ट्री और रिश्तों के अनोखे रंग
हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन ने भी पिता-पुत्र के अनूठे रिश्तों को पर्दे पर जीने में कोई कसर नहीं छोड़ी। फिल्म '102 नॉट आउट' में उन्होंने एक जिंदादिल 102 वर्षीय बुजुर्ग पिता की भूमिका निभाई, जबकि दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर उनके 75 साल के संजीदा बेटे के रूप में नजर आए। निर्देशक उमेश शुक्ला की इस फिल्म ने बढ़ती उम्र के बीच बाप-बेटे की खट्टी-मीठी और प्यारी केमिस्ट्री को बेहद सलीके से दिखाया। वहीं, साल 2009 में आई निर्देशक आर. बाल्की की अनूठी फिल्म 'पा' ने तो सिनेमाई इतिहास ही रच दिया। इस फिल्म में वास्तविक जीवन के पिता-पुत्र की जोड़ी ने पर्दे पर अपनी भूमिकाएं पूरी तरह बदल ली थीं। प्रोजेरिया नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित 13 साल के बच्चे के रूप में अमिताभ बच्चन ने अपनी मासूमियत से सबका दिल जीत लिया, जबकि उनके सगे बेटे अभिषेक बच्चन ने फिल्म में उनके पिता और एक सच्चे दोस्त का किरदार निभाकर इस मार्मिक कहानी को अमर बना दिया।
क्लासिक सिनेमा में पिता के आदर्शों और संस्कारों की विरासत
नब्बे के दशक की कुछ शानदार फिल्में आज भी पिता-पुत्र के गहरे जुड़ाव की मिसाल मानी जाती हैं। प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी साल 1997 की फिल्म 'विरासत' इसी श्रेणी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें अनिल कपूर अपने पिता अमरीश पुरी के उच्च आदर्शों, गांव की माटी और परंपराओं का मान रखने के लिए अपनी आधुनिक विदेशी जिंदगी और सुख-सुविधाओं का त्याग कर देते हैं। इसी तरह, साल 1996 में आई राजकुमार संतोषी की कल्ट फिल्म 'घातक' काशीनाथ (सनी देओल) और उनके आदर्शवादी पिता शंभूनाथ (अमरीश पुरी) के बीच के गहरे भावनात्मक रिश्ते को दर्शाती है, जहां एक बेटा अपने बीमार पिता के स्वाभिमान की रक्षा के लिए क्रूर व्यवस्था से अकेले टकरा जाता है। इसके अलावा, साल 1995 में आई मंसूर खान की भावुक फिल्म 'अकेले हम अकेले तुम' में आमिर खान ने एक ऐसे संघर्षशील पिता का जीवंत किरदार निभाया है, जो अपनी पत्नी (मनीषा कोइराला) के चले जाने के बाद अपने छोटे से बेटे (आदिल रिजवी) की परवरिश के लिए अपनी खुशियां और पूरा जीवन समर्पित कर देता है।
