दिल्ली से हरिद्वार-गाजियाबाद तक फैला था नेटवर्क, 300 CCTV फुटेज ने सुलझाई गुत्थी

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की एक विशेष टीम ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (एनडीआरएस) पर सक्रिय बच्चों का अपहरण कर उन्हें बेचने वाले एक बेहद शातिर और संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन महिलाओं सहित गिरोह के आठ सक्रिय सदस्यों को दबोच लिया है। राहत की बात यह है कि पुलिस की मुस्तैदी से रेलवे स्टेशन से अगवा किए गए महज डेढ़ साल के एक मासूम बच्चे को सुरक्षित छुड़ा लिया गया है। इस रैकेट से जुड़े अपराधियों की गिरफ्तारियां दिल्ली के अलावा हरिद्वार, गाजियाबाद और उत्तर प्रदेश के बदायूं जैसे शहरों से हुई हैं।

तीन सौ से अधिक सीसीटीवी कैमरों की मदद से मासूम की बरामदगी

इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले की शुरुआत तब हुई जब गत 25 मई को अपने पति से अलग रह रही एक महिला ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन थाने में अपने डेढ़ वर्षीय बालक के गुम होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। शिकायतकर्ता महिला अक्सर रात गुजारने के लिए स्टेशन के मुख्य हॉल का सहारा लेती थी, जहां से अपराधियों ने उसके बच्चे को गायब कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए इंस्पेक्टर याकूब खान के नेतृत्व में गठित जांच दल ने स्टेशन और उसके आसपास के लगभग 300 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया। वीडियो फुटेज में तीन संदिग्ध आरोपी बच्चे को ई-रिक्शा से शास्त्री पार्क होते हुए गाजियाबाद ले जाते दिखे। इसके बाद तकनीकी इनपुट के आधार पर पुलिस ने हरिद्वार में छापेमारी कर मासूम को बरामद कर लिया।

बदायूं की महिला ने पुत्र की लालसा में किया था डेढ़ लाख का सौदा

पुलिस की गहन पूछताछ में इस सनसनीखेज अपहरण के पीछे की मुख्य वजह सामने आई। बदायूं की रहने वाली आरती नामक महिला की पांच बेटियां थीं और वह पुत्र की चाहत में काफी समय से कोई बच्चा गोद लेने की कोशिश कर रही थी। विधिक अड़चनों के कारण जब वह बच्चा गोद नहीं ले पाई, तो उसकी बहन पूजा ने उसकी मुलाकात हरिद्वार की एक दलाल प्रीति से करवाई। प्रीति ने इस मासूम को चोरी करने के लिए अपने गुर्गों जिया, विशाल और शिवा को काम पर लगाया और डेढ़ लाख रुपये में बच्चे का सौदा तय हुआ। पुलिस ने आरती और पूजा को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है, जबकि बाकी के छह आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लेकर उनके पूरे नेटवर्क को खंगालने का प्रयास किया जा रहा है।

मेडिकल नेटवर्क की मिलीभगत और फर्जी जन्म प्रमाणपत्र का खेल

इस सिंडिकेट की परतें खुलने के बाद पुलिस अब उन परिवारों पर शिकंजा कस रही है जिन्होंने पिछले डेढ़ वर्षों में इस गिरोह से करीब 30 से अधिक नवजात शिशुओं को खरीदा था। जांच के लिए गठित तीन विशेष टीमों ने दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में फैले ऐसे 24 खरीदार परिवारों को चिन्हित किया है। इसी जांच के सिलसिले में पुलिस ने बेगमपुर स्थित डॉ. विवेकी के हीरा मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल पर छापा मारकर महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए। जांच में खुलासा हुआ कि यह अस्पताल फर्जी दस्तावेज और जाली जन्म प्रमाणपत्र तैयार करने का मुख्य केंद्र था, ताकि खरीदे गए बच्चों को कानूनी रूप से उस दंपती की ही संतान साबित किया जा सके। इस गिरोह को मुख्य रूप से डॉ. विवेकी, बच्चों की व्यवस्था करने वाला साएबा भाई घमर उर्फ कालिया और खरीदार ढूंढने वाली प्रतिभा व ओमवती मिलकर चला रहे थे।

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