शशि थरूर का बड़ा हमला, केरल की वित्तीय हालत पर उठाए सवाल

तिरुवनंतपुरम। केरल की नवनिर्वाचित यूडीएफ सरकार द्वारा अपना पहला वार्षिक वित्तीय बजट संसद के पटल पर रखे जाने के ठीक अगले दिन शनिवार को कांग्रेस के दिग्गज राजनेता शशि थरूर ने विपक्षी दल सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाले एलडीएफ मोर्चे पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए कड़ा रुख अपनाते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार द्वारा पेश किए गए एक बेहद आधुनिक और दूरदर्शी बजट के जवाब में वामपंथी गठबंधन केवल अपनी 'पुरानी और घिसी-पिटी कम्युनिस्ट विचारधारा' का रोना रो रहा है।
वामपंथी सरकार छोड़ गई पांच लाख करोड़ से अधिक का भारी-भरकम कर्ज
शशि थरूर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर बजट के खिलाफ वामपंथी नेताओं के बयानों की कड़ी निंदा की। उन्होंने विशेष रूप से विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की उन टिप्पणियों पर पलटवार किया, जिसमें विजयन ने दावा किया था कि एलडीएफ के पिछले दो कार्यकालों ने यह साबित किया कि सामाजिक न्याय, लोक कल्याण और सार्वजनिक निवेश को आर्थिक प्रगति के साथ समानांतर रूप से आगे बढ़ाया जा सकता है। थरूर ने इस वामपंथी आर्थिक मॉडल को पूरी तरह खोखला बताते हुए कहा कि इस तथाकथित मॉडल का असली परिणाम राज्य पर चढ़ा बेतहाशा कर्ज का बोझ है, जिसके तहत पिछली सरकार केरल पर 5.07 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज छोड़कर गई और उसे अपने कर्मचारियों के वेतन व त्योहारों पर ओणम बोनस बांटने के लिए भी बाजार से पैसे उधार लेने पड़े थे।
पिछली सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार पर तीखा कटाक्ष
कांग्रेस सांसद ने वामपंथियों के दस साल के शासनकाल पर सीधा प्रहार करते हुए इसे राज्य के इतिहास का सबसे खराब दौर करार दिया। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एलडीएफ के एक दशक लंबे इस कार्यकाल में जनता को केवल 'असीमित कर्ज, चौतरफा विफलता, संस्थागत भ्रष्टाचार और बही-खातों में हेरफेर' के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ। थरूर ने तंज कसते हुए कहा कि जब ऐसे निराशाजनक रिकॉर्ड वाले वामपंथी दल आज एक प्रगतिशील बजट पर ज्ञान देने या बहस करने की कोशिश करते हैं, तो राज्य की जागरूक जनता को यह समझ नहीं आता कि उनके इस दोहरे चरित्र पर हंसा जाए या फिर सूबे की बदहाली पर रोया जाए।
विजयन का पलटवार और खजाना मजबूत होने का पुराना दावा
इससे पूर्व, यूडीएफ सरकार के बजट की कमियां निकालते हुए पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने वर्तमान सत्तापक्ष को आड़े हाथों लिया था। उन्होंने नए बजट में किए गए विभिन्न वित्तीय आवंटनों पर सवाल उठाते हुए तर्क दिया था कि राज्य में गंभीर वित्तीय आपातकाल होने के बार-बार किए जा रहे सरकारी दावों के विपरीत बजट के आंकड़े एक अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं। विजयन ने दावा किया था कि उनकी एलडीएफ सरकार ने विदा होते समय राज्य के खजाने में पर्याप्त वित्तीय संसाधन और धनराशि छोड़ी थी, जिसका उपयोग वर्तमान सरकार जन कल्याणकारी योजनाओं तथा विकास कार्यों को गति देने के लिए सुगमता से कर सकती थी। उन्होंने यह आरोप भी जड़ा कि नई सरकार ने कई जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्रों के बजट आवंटन में या तो भारी कटौती की है या फिर उन्हें जनता की उम्मीदों के मुताबिक धन आवंटित नहीं किया गया है।
