हार्टब्रेक गानों की परंपरा पर सोना मोहापात्रा का बड़ा बयान, सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

अपनी बुलंद आवाज और बेबाक अंदाज के लिए पहचानी जाने वाली मशहूर सिंगर सोना मोहापात्रा ने एक बार फिर फिल्म उद्योग की आंतरिक कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। मनोरंजन जगत में महिलाओं की कम हिस्सेदारी, लैंगिक असमानता (सेक्सिज्म) और पक्षपात जैसे गंभीर मुद्दों पर अक्सर खुलकर बोलने वाली सोना ने इस बार बॉलीवुड म्यूजिक इंडस्ट्री के मौजूदा सिस्टम को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर महिला गायिकाओं को बराबरी का हक न मिलने पर गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की है।
'ये कैसा डुएट है, जिसमें लड़की सिर्फ आखिर में आती है?'
सोना मोहापात्रा ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए बॉलीवुड के गानों के पीछे की कड़वी सच्चाई को उजागर किया। उन्होंने कहा, "आज के दौर में बॉलीवुड के जितने भी दिल टूटने (हार्टब्रेक) वाले या गहरे जज्बात के गाने आ रहे हैं, वे सभी पुरुषों के लिए रिजर्व कर दिए गए हैं। पर्दे पर प्यार की गहराई भी वही महसूस करते हैं और टूटे दिल का दर्द भी उन्हीं के माध्यम से दिखाया जाता है।"
अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए सिंगर ने आगे बताया, "मुझे जब भी किसी डुएट (युगल) गीत के लिए रिकॉर्डिंग स्टूडियो बुलाया गया, तो अक्सर मुझे पूरे गाने में बहुत कम जगह दी गई और सिर्फ आखिर की कुछ लाइनों में गाने का मौका मिला।" उन्होंने एक बेहद चर्चित गाने का जिक्र करते हुए कहा कि जब उन्हें उस गाने के शुरुआती ट्रैक के लिए बुलाया गया था, तो वह उसका स्ट्रक्चर देखकर पूरी तरह हैरान रह गई थीं।
सोना ने म्यूजिक कंपोजर्स की सोच पर सवाल उठाते हुए कहा, "उस गाने में मुखड़ा, अंतरा और मुख्य सुर- सब कुछ पुरुष सिंगर के हिस्से में डाल दिया गया था। महिला सिंगर की आवाज बस अंत में कुछ पलों के लिए आती है। मैंने तत्कालीन म्यूजिक डायरेक्टर से सीधे पूछा था कि क्या फिल्म का नायक खुद से ही मोहब्बत कर रहा है? यह कैसा डुएट गाना है, जिसमें फीमेल वॉयस को केवल अंत में एक औपचारिकता की तरह इस्तेमाल किया गया है?" हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह किसी एक संगीतकार या कलाकार की व्यक्तिगत गलती नहीं है, बल्कि पूरी इंडस्ट्री का ढांचा ही ऐसा रूढ़िवादी हो चुका है, जो प्रयोग करने या कोई नया रिस्क लेने से लगातार बचता है।
प्रतिनिधित्व का संकट: महिला सिंगर्स को बराबरी का मुकाम कैसे मिलेगा?
सोना मोहापात्रा के अनुसार, यह समस्या केवल कुछ चुनिंदा गानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के प्रतिनिधित्व (रिप्रेजेंटेशन) से जुड़ा एक बेहद गंभीर और गहरा मुद्दा है। यदि मुख्यधारा का सिनेमा महिलाओं के दृष्टिकोण से मजबूत और भावनात्मक कहानियां बुनना बंद कर देगा, तो आने वाले समय में संगीत और अभिनय के क्षेत्र में बड़ी फीमेल सुपरस्टार्स का उभरना लगभग नामुमकिन हो जाएगा।
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, "बात यह बिल्कुल नहीं है कि महिला गायिकाओं ने कभी दर्द भरे या कालजयी गाने नहीं गाए हैं। इतिहास गवाह है कि फीमेल सिंगर्स ने एक से बढ़कर एक सदाबहार नगमे दिए हैं। असली चिंता की बात यह है कि अब समकालीन दौर के गीतकारों और संगीतकारों द्वारा ऐसे बड़े पैमाने के गाने महिलाओं के नजरिए को ध्यान में रखकर लिखे ही नहीं जा रहे हैं। जब इंडस्ट्री के 80 से 90 प्रतिशत बड़े और बजट वाले गाने सिर्फ पुरुष कलाकारों के इर्द-गिर्द केंद्रित होंगे, तो महिला सिंगर्स को पुरुषों के समकक्ष बराबरी का मुकाम और पहचान कैसे हासिल होगी?"
चर्चित गाने 'जालिमा' का संदर्भ
गौरतलब है कि चर्चा में आया सुपरहिट गाना ‘जालिमा’ साल 2017 में रिलीज हुई बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान और माहिरा खान स्टारर फिल्म ‘रईस’ का है। इस बेहद लोकप्रिय रोमांटिक ट्रैक को मुख्य रूप से अरिजीत सिंह और हर्षदीप कौर की आवाजों में रिकॉर्ड किया गया था। सोना ने इसी शैली के गानों की संरचना को आधार बनाकर पूरी म्यूजिक इंडस्ट्री के भीतर पनप रही इस असमानता के खिलाफ आवाज उठाई है, जिसकी सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा हो रही है।
