पार्टी में बगावत की अटकलों पर शरद पवार की सफाई, बोले- हमारा एक भी विधायक नहीं जाएगा

मुंबई। महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में मचे घमासान और लगातार जारी उठापटक के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) के मुखिया शरद पवार ने अपनी पार्टी में फूट की तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है। शिवसेना (यूबीटी) में हुई बड़ी टूट के बाद से ही मीडिया और सियासी हल्कों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि अब शरद पवार के गुट में भी बगावत हो सकती है। इन सभी अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए एनसीपी प्रमुख ने साफ कहा, "पार्टी में टूट की ये सभी चर्चाएं पूरी तरह से बेबुनियाद और बेमतलब हैं। हमारा एक भी विधायक या सांसद पार्टी छोड़कर कहीं नहीं जा रहा है।" इससे पहले पार्टी प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने भी स्पष्ट किया था कि हमारे सभी 8 सांसद और 10 विधायक शरद पवार के नेतृत्व में पूरी तरह एकजुट हैं और विपक्ष द्वारा उन्हें जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है।

एमवीए (MVA) की बैठक से 23 विधायक नदारद; शरद पवार और जयंत पाटिल के न पहुंचने से खड़े हुए सवाल

महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के बीच महाविकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन की आंतरिक कलह भी अब खुलकर सामने आने लगी है। सत्र के दौरान विपक्षी रणनीति तय करने के लिए महाविकास अघाड़ी के सहयोगी दलों की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में कुल 60 विधायकों में से केवल 37 विधायक ही पहुंचे, जबकि 23 विधायक गायब रहे। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि खुद शरद पवार और वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल (निजी कारणों का हवाला देकर) इस बैठक में शामिल नहीं हुए। इतनी बड़ी संख्या में शीर्ष नेताओं और विधायकों की अनुपस्थिति ने गठबंधन के भीतर एक बार फिर बड़ी दरार और टूट के आसारों को हवा दे दी है।

उद्धव ठाकरे का सहयोगियों से तीखा सवाल: 'हम केवल दिखाने के लिए साथ हैं या वाकई में एकजुट हैं?'

बैठक में विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की इस बेरुखी पर शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे ने बैठक के दौरान सहयोगियों को आड़े हाथों लेते हुए तीखा सवाल दागा। उन्होंने कहा, "हम बाहर तो महाविकास अघाड़ी के रूप में एक साथ होने का बड़ा दावा करते हैं, लेकिन क्या जमीनी हकीकत में हम वाकई एकजुट हैं?" ठाकरे ने सभी दलों को सचेत करते हुए कहा कि यदि आगामी चुनावों में मजबूती से लड़ना है, तो हमें आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होकर ही काम करना होगा। इसके साथ ही उन्होंने मानसून सत्र के दौरान सदन के भीतर जनता से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष को एक सुर में सरकार को घेरने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।

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