अयोध्या घोटाला: जांच रिपोर्ट के गायब होने से तेज हुई सियासी और प्रशासनिक हलचल

अयोध्या: राम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि की चोरी का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद, ट्रस्ट द्वारा की गई जमीनों की खरीद-फरोख्त के पुराने विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। इस पूरे प्रकरण में जमीन सौदों संबंधी वित्तीय गड़बड़ियों की जांच के लिए पांच साल पहले गठित की गई 'राधेश्याम मिश्रा कमेटी' की रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं हो सकी है। हालांकि, ताजा घटनाक्रम के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम (SIT) ने अब इन पुराने जमीन विवादों को भी अपनी जांच के दायरे में शामिल कर लिया है।

5 मिनट में 2 करोड़ की जमीन हुई 18 करोड़ की, चंदे के पैसों के नुकसान का आरोप

सामने आए विवरण के मुताबिक, राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने वर्ष 2020 और 2021 के दौरान कई जमीनों के सौदे किए थे, जिन पर बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत चुकाने के गंभीर आरोप लगे हैं। एक मामले में एक किसान से महज 2 करोड़ रुपये में खरीदी गई जमीन को सिर्फ 5 मिनट के भीतर ट्रस्ट को 18.5 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। इस अकेले सौदे में करीब 16.5 करोड़ रुपये के अंतर का दावा किया गया है। इस बैनामे में तत्कालीन मेयर ऋषिकेश उपाध्याय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा गवाह के रूप में शामिल थे।

इसी तरह एक अन्य सौदे के तहत, तत्कालीन मेयर के भतीजे दीप नारायण ने फरवरी 2021 में जो जमीन 20 लाख रुपये में खरीदी थी, उसे महज कुछ महीनों बाद मई 2021 में ट्रस्ट को 2.5 करोड़ रुपये में बेच दिया गया, जिससे सीधे तौर पर 2.30 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया गया।

सरकारी और नजूल भूमि को भी महंगे दामों पर खरीदने का दावा

इस मामले को लेकर विपक्षी दल के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एसआईटी के अध्यक्ष विजय विश्वास पंत और सदस्य नील रतन से मुलाकात कर 11 महत्वपूर्ण दस्तावेज सौंपे हैं। सौंपे गए दस्तावेजों के अनुसार:

  • गाटा संख्या 247 की जमीन: अप्रैल 2024 में इस जमीन को 2.93 करोड़ रुपये के वास्तविक मूल्य के बजाय ₹23.61 करोड़ की भारी-भरकम राशि में खरीदा गया। आरोप है कि यह जमीन राजस्व रिकॉर्ड में नजूल (सरकारी भूमि) के रूप में दर्ज थी।

  • नवंबर 2023 का सौदा: करीब 9 करोड़ रुपये मूल्य की एक अन्य जमीन को ₹55.47 करोड़ में ट्रस्ट द्वारा खरीदा गया।

सांसद ने आरोप लगाया है कि चढ़ावा चोरी में संलिप्त कुछ लोगों की भूमिका इन जमीन सौदों में भी रही है, जिससे मंदिर के चंदे की राशि को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। उन्होंने महंत रघुवर शरण और यशोदा नंदन त्रिपाठी से जुड़े भूमि सौदों की भी गहन जांच की मांग की है।

कमेटी की जांच अधूरी, जनहित याचिका पर भी बढ़ा दबाव

इन विवादों को लेकर पूर्व में अदालत में एक जनहित याचिका (PIL) भी दायर की गई थी। उस दौरान सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए राधेश्याम मिश्रा कमेटी का गठन किया जा चुका है और उसे एक से दो सप्ताह का समय दिया गया है। इस आश्वासन के बाद अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया था, लेकिन सालों बीत जाने के बाद भी वह जांच रिपोर्ट ठंडे बस्ते में ही पड़ी रही। अब एसआईटी इन नए और पुराने दोनों दस्तावेजों के आधार पर विस्तृत जांच को आगे बढ़ा रही है।

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