9 साल बाद MDMK ने DMK गठबंधन से तोड़ा नाता, तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर

चेन्नई। दक्षिण भारत की राजनीति और तमिलनाडु के सत्ता समीकरणों से इस समय की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है, जहां मारुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एमडीएमके) ने सत्तारूढ़ डीएमके के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) से अपनी राहें पूरी तरह अलग करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस बड़े फैसले के साथ ही दोनों क्षेत्रीय दलों के बीच पिछले 9 वर्षों से चला आ रहा पुराना राजनीतिक साथ भी आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है। चेन्नई में आयोजित एमडीएमके की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय संगठनात्मक बैठक में, जिसकी अध्यक्षता स्वयं पार्टी के कद्दावर महासचिव वाइको कर रहे थे, सर्वसम्मति से एक राजनीतिक प्रस्ताव पारित किया गया। इस आधिकारिक प्रस्ताव के जरिए पार्टी ने डीएमके गठबंधन को छोड़ने और भविष्य में एक स्वतंत्र राजनीतिक विकल्प के रूप में आगे बढ़ने की विधिवत घोषणा कर दी है।
विधानसभा चुनाव में पराजय और अभिनेता विजय की पार्टी 'टीवीके' का उभार
यह दूरगामी नीतिगत बदलाव वर्ष 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन (एसपीए) को मिली करारी शिकस्त और सत्ता विरोधी लहर के बाद सामने आया है। इस ऐतिहासिक चुनाव में दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार से राजनेता बने सी. जोसेफ विजय की नवनिर्मित पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (टीवीके) अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए राज्य के विधायी इतिहास में सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में उभरकर सामने आई है। एमडीएमके द्वारा पारित प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया कि उनकी पार्टी पूर्व में इस गठबंधन का हिस्सा केवल इसलिए बनी थी और लंबे समय तक टिकी रही, क्योंकि वह तमिलनाडु की धरती पर “सांप्रदायिक और विभाजनकारी राजनीतिक ताकतों” को पैर पसारने से रोकने के लिए वैचारिक और सैद्धांतिक रूप से पूरी तरह प्रतिबद्ध थी।
स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को कमजोर करने का आरोप और 9 साल का सफरनामा
पार्टी के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, 3 दिसंबर 2017 को एक उच्च स्तरीय समिति द्वारा पारित प्रस्ताव के बाद से ही एमडीएमके निरंतर डीएमके के नेतृत्व वाले मोर्चे का एक वफादार घटक दल रही थी। पारित किए गए इस नए शिकायती प्रस्ताव में कड़े शब्दों में कहा गया है कि हालिया विधानसभा चुनावों के दौरान, गठबंधन के भीतर एमडीएमके की 32 वर्षों की गौरवशाली और लंबी राजनीतिक यात्रा व सांगठनिक क्षमता के बावजूद, उसकी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और वजूद को जानबूझकर हाशिए पर धकेलने व कमजोर करने की सुनियोजित कोशिशें की गईं। इन तमाम आंतरिक मतभेदों और असहज परिस्थितियों के बावजूद, पार्टी ने गठबंधन धर्म का पालन करते हुए सहयोगियों के साथ मिलकर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया था।
एआईएडीएमके को सत्ता सौंपने की कथित कोशिशें और वैचारिक समझौता
चुनाव परिणाम आने के बाद के घटनाक्रमों पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए, एमडीएमके के शीर्ष नेतृत्व ने सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (एसपीए) के नीति-निर्धारकों पर अपनी घोषित मूल विचारधारा और बुनियादी सिद्धांतों से पूरी तरह समझौता करने का संगीन आरोप लगाया है। प्रस्ताव में खुले तौर पर दावा किया गया है कि यह राजनीतिक गलियारों में किसी से छिपा नहीं है कि किस प्रकार हिंदुत्ववादी ताकतों के साथ परोक्ष साठगांठ करके अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) को सत्ता की चाबी सौंपने की कोशिशें की गईं, जबकि उसने विधानसभा में महज 47 सीटें ही हासिल की थीं। पार्टी ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि इन संदिग्ध कूटनीतिक गतिविधियों के कारण अब इस मोर्चे का खुद को विचारधारा और धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों पर आधारित गठबंधन कहना पूरी तरह बेमानी और खोखला साबित हो चुका है।
