650 करोड़ के कथित घोटाले पर सियासत गरमाई, AAP ने सरकार पर साधा निशाना

नई दिल्ली। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के लिए दवाओं और उपकरणों की खरीद से जुड़ी सेंट्रल परचेजिंग एजेंसी (CPA) में ₹650 करोड़ के कथित घोटाले को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार पर तीखा हमला बोला है। मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए 'आप' के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि दिल्ली में 27 साल बाद सत्ता में आई 16 महीने की इस सरकार ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत इस बड़े घोटाले को अंजाम दिया है।

दवा और उपकरण खरीद नियमों में बदलाव का आरोप

सौरभ भारद्वाज ने पूरे घटनाक्रम का ब्यौरा देते हुए कहा कि फरवरी 2025 में सरकार बनने के बाद, उसी वर्ष 10 जुलाई को एक नया आदेश जारी किया गया। इस आदेश के तहत दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों द्वारा स्वतंत्र रूप से दवाएं और उपकरण खरीदने पर रोक लगा दी गई और यह पूरी जिम्मेदारी सीपीए (CPA) को सौंप दी गई। 'आप' नेता ने दावा किया कि इस फैसले को लेकर तत्कालीन डीजीएचएस (DGHS) डॉ. रति मक्कड़ पर भारी दबाव था, जिसके चलते उन्होंने जुलाई 2025 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली थी।

वरिष्ठ डॉक्टरों की अनदेखी कर दागी अफसर को जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर सीधा निशाना साधते हुए सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अगस्त 2025 में कई सीनियर डॉक्टरों को नजरअंदाज करके डॉ. वत्सला अग्रवाल को डीजीएचएस का कार्यभार सौंप दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'आप' विधायक सोमनाथ भारती ने डॉ. वत्सला के खिलाफ पहले ही विजिलेंस में शिकायत दर्ज कराई थी और उनकी जांच चल रही थी। इसके बावजूद, सरकार ने जानबूझकर एक ऐसी अधिकारी को सीपीए का प्रभार दिया, जिनके खिलाफ पूर्व में 'आप' विधायक राजेंद्र पाल गौतम ने भी शिकायतें की थीं।

बाजार दर से कई गुना महंगे दामों पर हुई सरकारी खरीद

घोटाले की परतों को खोलते हुए 'आप' अध्यक्ष ने कुछ चौंकाने वाले आंकड़े मीडिया के सामने रखे:

  • एक्स-रे मशीन: जो एक्स-रे मशीन बाजार में ₹10 लाख की आती है, उसे ₹25 लाख में खरीदा गया।

  • ओआरएस (ORS) पैकेट: दिल्ली के अस्पतालों के लिए 50 लाख ओआरएस पैकेट खरीदे गए। ₹15 की कीमत वाला एक पैकेट ₹205 के ऊंचे दामों पर लिया गया, जिसमें प्रति पैकेट ₹190 का कमीशन खाने का आरोप है।

  • अस्पताल की चादरें: जीईएम (GeM) पोर्टल पर ₹150 में मिलने वाली चादर को तीन गुना अधिक यानी ₹450 की दर पर खरीदा गया।

बेड क्षमता से कई गुना अधिक चादरों की बुकिंग

सौरभ भारद्वाज ने अस्पतालों की क्षमता और की गई खरीद के अंतर को उजागर करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार के अस्पतालों में कुल बेड की क्षमता 15,659 है, लेकिन सरकार ने ₹75 करोड़ की लागत से 16,66,666 चादरें खरीद डालीं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि एक 200 बेड वाले अस्पताल के लिए 20,000 चादरें ली गईं, जिसका मतलब है कि प्रति बेड 106 चादरों का आवंटन किया गया।

अकेले अधिकारी के बस की बात नहीं, सरकार भी शामिल

सोशल मीडिया पर डॉ. वत्सला अग्रवाल की तस्वीरें प्रसारित किए जाने पर टिप्पणी करते हुए 'आप' नेता ने साफ किया कि वह संबंधित अधिकारी को कोई क्लीन चिट नहीं दे रहे हैं क्योंकि भ्रष्टाचार में उनकी भूमिका की शिकायत स्वयं उनकी पार्टी ने की थी। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि ₹650 करोड़ का इतना बड़ा घोटाला कोई अधिकारी अकेले अपने दम पर नहीं कर सकता। इसमें पूरी सरकार की मिलीभगत और सोची-समझी योजना शामिल है।

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