‘TVK विधायकों को तोड़ने के लिए 35-35 करोड़ का ऑफर’, संजय राउत का बड़ा आरोप

मुंबई। महाराष्ट्र के मौजूदा सियासी घटनाक्रम और जारी राजनीतिक घमासान के बीच शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने विपक्षी दलों को तोड़ने की राजनीति पर कड़ा ऐतराज जताते हुए दावा किया कि सत्ता पक्ष में दूसरों को तोड़ने का ऐसा नशा है कि एक दिन यह प्रवृत्ति खुद उनके अपने ही गठबंधन के भीतर नजर आने लगेगी। संजय राउत ने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि लोकतंत्र का स्तर लगातार गिरता जा रहा है, जिसे लेकर आने वाली पीढ़ी को भी सचेत करना होगा।
विपक्षी दलों को तोड़ने का आरोप और केंद्रीय एजेंसियों पर तीखा तंज
शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग केंद्रीय जांच एजेंसियों और भारी-भरकम धनबल का दुरुपयोग करके विपक्षी पार्टियों को लगातार कमजोर करने और उन्हें तोड़ने का काम कर रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस दिन यह लोग सत्ता से बाहर होंगे और सुरक्षा एजेंसियां उनके नियंत्रण में नहीं रहेंगी, उस दिन स्थितियां पूरी तरह बदल जाएंगी। उन्होंने दावा किया कि अगर केवल एक घंटे के लिए ईडी और सीबीआई जैसी जांच एजेंसियां विपक्ष को सौंप दी जाएं, तो विपक्षी दलों को तोड़ने वाले गुटों और दलों का वजूद बिखरने में दस मिनट का समय भी नहीं लगेगा।
तमिलनाडु की राजनीति को लेकर लगाया विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप
महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ संजय राउत ने दक्षिण भारत के राज्य तमिलनाडु के सियासी हालात को लेकर भी एक बड़ा दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां टीवीके (तमिलागा वेत्री कड़गम) के विधायकों को तोड़ने के लिए करीब 35-35 करोड़ रुपये का बड़ा खेल खेला जा रहा है। उन्होंने कहा कि लगभग 15 विधायकों को अपने पाले में करके वहां की चुनी हुई सरकार को गिराने की पुरजोर कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि राजनीति का स्तर इतना नीचे गिर चुका है कि बिना किसी को तोड़े कुछ लोगों को चैन की नींद भी नहीं आती।
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर बड़े पदाधिकारियों की गिरफ्तारी की मांग
राजनीतिक उठापटक के अलावा संजय राउत ने अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े हालिया विवाद को लेकर भी केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में अब तक केवल छोटे स्तर के लोगों पर ही कार्रवाई की गाज गिरी है, जबकि इस मामले के मुख्य और गंभीर आरोपियों को अभी तक छुआ भी नहीं गया है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और इसमें शामिल ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए, ताकि सच्चाई पूरी तरह से सामने आ सके।
