आर्ट्स और कॉमर्स छात्रों के लिए खुशखबरी, अब पायलट बनने का मिलेगा अवसर

देश के एविएशन सेक्टर (उड्डयन क्षेत्र) से उन लाखों युवाओं के लिए एक बेहद शानदार और ऐतिहासिक खुशखबरी सामने आई है, जो कला (Arts) या वाणिज्य (Commerce) स्ट्रीम से पढ़ाई करने के कारण अब तक पायलट बनने की दौड़ से बाहर हो जाते थे। केंद्र सरकार की विमानन नियामक संस्था डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविऐशन (DGCA) ने कमर्शियल पायलट बनने के शैक्षणिक योग्यता नियमों में एक युगांतकारी और बड़ा बदलाव कर दिया है। नए दिशानिर्देशों के तहत, अब आर्ट्स और कॉमर्स विषयों के साथ 12वीं पास करने वाले छात्र भी कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) की ट्रेनिंग में सीधे शामिल हो सकेंगे। डीजीसीए के इस बड़े फैसले के बाद अब आसमान छूने और पायलट के तौर पर एक बेहतरीन कॅरियर बनाने के दरवाजे देश के हर स्ट्रीम के छात्रों के लिए पूरी तरह से खुल गए हैं।

फिजिक्स और मैथ्स की अनिवार्यता समाप्त, सीमाओं के बंधन से मुक्त हुए छात्र

भारतीय विमानन इतिहास में अब तक कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) ट्रेनिंग की पात्रता के लिए एक बेहद सख्त नियम लागू था:

  • पुरानी अनिवार्य शर्त: इससे पहले तक केवल वही छात्र पायलट ट्रेनिंग के लिए आवेदन कर सकते थे, जिन्होंने अपनी 12वीं की पढ़ाई विज्ञान संकाय (Science Stream) से की हो और जिनके पास अनिवार्य रूप से भौतिक विज्ञान (Physics) और गणित (Maths) जैसे कठिन विषय रहे हों।

  • बदलाव से किसे मिलेगा फायदा: डीजीसीए द्वारा इस विषयगत अनिवार्यता को पूरी तरह से हटा दिए जाने के बाद, अब उन मेधावी छात्रों को सबसे बड़ा फायदा मिलेगा जो पायलट बनने की तीव्र इच्छा और योग्यता तो रखते थे, लेकिन 10वीं के बाद आर्ट्स या कॉमर्स चुनने की वजह से इस क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर पाते थे।

मेडिकल फिटनेस के कड़े नियमों में कोई ढील नहीं, सबके लिए मानदंड रहेंगे समान

डीजीसीए ने भले ही शैक्षणिक योग्यता और विषयों की बंदिशों को खत्म करके पायलट बनने की राह को आसान बना दिया है, लेकिन सुरक्षा और स्वास्थ्य के मानकों पर किसी भी प्रकार का कोई समझौता नहीं किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मेडिकल फिटनेस मानदंड (Medical Fitness Criteria) सभी आवेदकों के लिए पहले की तरह ही कड़े और समान रहेंगे।

इसका सीधा मतलब यह है कि आवेदक ने चाहे किसी भी स्ट्रीम (आर्ट्स, कॉमर्स या साइंस) से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की हो, उसे डीजीसीए द्वारा निर्धारित क्लास-1 और क्लास-2 के बेहद कठिन व विस्तृत मेडिकल टेस्ट को अनिवार्य रूप से पास करना ही होगा। शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह फिट होने पर ही छात्र को कॉकपिट में बैठने की अनुमति दी जाएगी।

1990 के दशक से लागू था यह कठिन नियम, जानें क्या है इसका पूरा इतिहास

पायलट की ट्रेनिंग को तकनीकी रूप से बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसमें विमान के संचालन के लिए कुछ बुनियादी तकनीकी जानकारी और गणितीय गणनाओं का ज्ञान होना बेहद जरूरी होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए:

1990 के दशक का नियम: भारत में साल 1990 के दशक के दौरान कमर्शियल पायलट बनने के लिए 12वीं कक्षा में साइंस और मैथ्स को अनिवार्य विषय बना दिया गया था। हालांकि, इस नियम के कारण इस प्रतिष्ठित क्षेत्र में कॅरियर बनाने वाले युवाओं की संख्या काफी सीमित हो गई थी और कई प्रतिभावान छात्र चाहकर भी आगे नहीं बढ़ पाते थे।

इससे पहले का नियम: यदि हम इससे भी पुराने इतिहास पर नजर डालें, तो इस 1990 के नियम से पहले भारत में कमर्शियल पायलट लाइसेंस (सीपिएल) हासिल करने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता मात्र कक्षा 10वीं पास होना तय की गई थी। अब वर्तमान परिदृश्य और दुनिया भर की आधुनिक ट्रेनिंग तकनीकों को देखते हुए डीजीसीए ने नियमों को उदार बनाया है, ताकि भारत में पायलटों की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके और युवाओं को कॅरियर के नए आसमान मिल सकें।

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