‘उसने जो किया, उसकी सजा मिली’, आरोपी की मां ने शव लेने से मना किया

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में हुए जघन्य बलात्कार और हत्याकांड के मुख्य आरोपी प्रभाष मंडल की मां ने ममता और संवेदना से ऊपर न्याय और नैतिकता को रखते हुए एक कड़ा फैसला लिया है। बुधवार को पुलिस मुठभेड़ (एनकाउंटर) में मारे गए अपने बेटे का शव लेने से उसकी मां ने साफ मना कर दिया है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि उनके बेटे ने जो घिनौना कृत्य किया था, उसकी सजा उसे मिलनी ही थी और वह ऐसे पापी का शव अपने घर नहीं लाएंगी।

"उसने कोई अच्छा काम नहीं किया था, जो चाहे करे पुलिस" – आरोपी की मां

स्थानीय मीडिया से भावुक लेकिन बेहद सख्त लहजे में बात करते हुए आरोपी प्रभाष मंडल की मां ने सुबह के घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बताया:

"सुबह जब मैं सोकर उठी ही थी, तब दो पुलिसवाले मेरे घर आए थे। उन्होंने मुझे सूचना दी कि मेरा बेटा प्रभाष मर चुका है और मुझसे पूछा कि क्या मैं उसका शव देखने या लेने अस्पताल चलना चाहूंगी। मैंने उनसे साफ कह दिया कि मेरे पति बीमार हैं और मैं नहीं आ सकती।"

उन्होंने आगे कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:

"मैंने पुलिसवालों से कह दिया है कि वे उस शव के साथ जो चाहें करें, मुझे कोई आपत्ति नहीं है। मेरे बेटे को उसके किए की सजा मिल गई है। मैं उसका शव लेकर कभी घर नहीं आऊंगी। उसने कोई अच्छा काम नहीं किया था, उसने एक मासूम के साथ गलत किया और उसे उसका कर्म भुगतना पड़ा। पुलिस उसे मार डाले या जो चाहे करे, मुझे कोई सरोकार नहीं है।"

क्राइम सीन रिक्रिएशन के दौरान हथियार छीनकर भागने की कोशिश में एनकाउंटर

इससे पहले बुधवार तड़के बारुईपुर पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम आरोपी प्रभाष मंडल को लेकर वारदात वाली जगह पर साक्ष्य जुटाने और 'क्राइम सीन रिक्रिएशन' (घटना के दोहराव) के लिए गई थी। बारुईपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) के मुताबिक, इसी दौरान आरोपी ने एक पुलिस अधिकारी की सर्विस पिस्टल छीनने की कोशिश की और पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी।

पुलिस अधीक्षक ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया:

"जब हमारी टीम घटना का रिक्रिएशन कर रही थी, तब आरोपी ने अचानक पुलिसकर्मी से हथियार छीन लिया और भागने के इरादे से पुलिस टीम पर गोली चला दी। आत्मरक्षा और जवाबी कार्रवाई में पुलिस को भी गोलियां चलानी पड़ीं, जिसमें प्रभाष गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।"

पुलिस ने यह भी साझा किया कि गिरफ्तारी के बाद से ही प्रभाष पूछताछ के दौरान लगातार जांच अधिकारियों को गुमराह कर रहा था और मामले से जुड़े मुख्य तथ्यों को छिपाकर जांच में बिल्कुल सहयोग नहीं कर रहा था।

क्या था पूरा मामला जिसने झकझोर दिया था बंगाल?

यह पूरा मामला एक 11 साल की मासूम बच्ची के साथ हुई बर्बरता से जुड़ा है:

  • लापता और बरामदगी: बीते 4 जुलाई को अपने घर के पास से लापता हुई 11 वर्षीय बच्ची का शव अगले दिन (5 जुलाई) सूर्यपुर हाट इलाके के एक सुनसान तालाब से बरामद किया गया था।

  • बर्बरता: पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, मासूम बच्ची की गला घोंटकर हत्या करने से पहले उसके साथ दरिंदगी (रेप) की गई थी। इसके बाद साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से उसकी लाश को एक बोरी में बंद कर तालाब में फेंक दिया गया था।

इस वीभत्स घटना के सामने आने के बाद पूरे बारुईपुर इलाके में जनआक्रोश भड़क उठा था। उग्र स्थानीय निवासियों ने इंसाफ की मांग को लेकर बारुईपुर-जयनगर मुख्य मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया था, सड़कों पर टायर जलाए थे और गुस्से में पुलिस की कई गाड़ियों में तोड़-फोड़ भी की थी। जनता लगातार इस मामले के दोषियों को तत्काल गिरफ्तार कर फांसी की सजा देने की मांग कर रही थी, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी को दबोचा था।

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