बाबा धाम में दर्शन होंगे आसान, शीघ्रदर्शनम श्रद्धालुओं के लिए नई व्यवस्था

देवघर। विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेले की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। इस वर्ष बाबा नगरी आने वाले भक्तों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में कतार प्रबंधन को पूरी तरह से अपग्रेड किया जा रहा है, जिससे पूजा-अर्चना की प्रक्रिया और अधिक सुगम हो जाएगी।
श्रावणी मेले में पहली बार मिलेगी शीघ्रदर्शनम की विशेष समर्पित कतार
सावन के पावन महीने में सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर आने वाले कांवरों और आम श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए इस बार एक नई व्यवस्था लागू की जा रही है। देवघर आने वाले भक्तों को इस साल शीघ्रदर्शनम के लिए एक पूरी तरह से डेडिकेटेड यानी समर्पित लाइन की सुविधा मिलने वाली है। इस नई कतार प्रणाली के क्रियान्वयन से कूपन लेकर बाबा भोलेनाथ के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के समय की भारी बचत होगी और उन्हें पहले के मुकाबले कम से कम आधा घंटा कम समय लाइन में बिताना पड़ेगा।
नवनिर्मित फुट ओवर ब्रिज का काम अंतिम चरण में और जल्द होगा ट्रायल
भीड़ को सुव्यवस्थित तरीके से मंदिर तक पहुंचाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत किया जा रहा है। इसी कड़ी में परिसर के पास बन रहे नए फुट ओवर ब्रिज का निर्माण कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है। वर्तमान में इस पुल के ऊपर शेड लगाने का काम तेजी से चल रहा है, जिसके पूरा होते ही इस पूरे मार्ग का ट्रायल रन शुरू कर दिया जाएगा। यह नया ओवर ब्रिज मुख्य मार्ग के दबाव को कम करने में बेहद मददगार साबित होगा।
सावन मेला शुरू होने से दस दिन पहले ही लागू हो जाएगी नई व्यवस्था
इस बार का वार्षिक श्रावणी मेला आगामी 30 जुलाई से विधिवत रूप से प्रारंभ होने जा रहा है। लेकिन प्रशासन ने इस नई कतार व्यवस्था को पूरी तरह से परखने के लिए इसे मेला शुरू होने के दस दिन पहले ही यानी 20 जुलाई से ही धरातल पर उतारने का निर्णय लिया है। समय से पहले इस व्यवस्था को चालू करने से सुरक्षा बलों और मंदिर प्रबंधन को इसके व्यावहारिक संचालन को समझने और कमियों को दूर करने का पर्याप्त समय मिल जाएगा।
सामान्य और विशेष कतारें अलग होने से आम भक्तों को भी मिलेगी राहत
इस नए कतार प्रबंधन की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि शीघ्रदर्शनम के कूपन धारकों और आम श्रद्धालुओं की लाइनें पूरी तरह से एक-दूसरे से अलग और स्वतंत्र होंगी। दोनों मार्गों के अलग हो जाने से जहाँ विशेष पास वाले श्रद्धालु बेहद सहजता से मंदिर गर्भगृह तक पहुंच सकेंगे, वहीं सामान्य कतार में लगे आम शिवभक्तों को भी किसी तरह की रुकावट या असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा और वे भी सुगमता से जलाभिषेक कर सकेंगे।
