सुप्रीम कोर्ट में अभद्रता पर भड़का SCBA, सरकार से की सख्त कार्रवाई की मांग

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में एक न्यायिक सुनवाई के दौरान एक वादी द्वारा किए गए अशोभनीय व्यवहार पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने गहरी नाराजगी जताई है। एसोसिएशन ने इसे न्यायपालिका की गरिमा और अदालती कार्यवाही की पवित्रता के लिए एक गंभीर खतरा करार दिया है। एससीबीए ने स्पष्ट किया है कि अदालत के भीतर अनुशासन और मर्यादा का पालन करना अनिवार्य है और इस प्रकार के व्यवधानों से कानून के तहत सख्ती से निपटा जाना चाहिए।

अदालती गरिमा और मर्यादा के प्रति चिंता

एससीबीए ने आधिकारिक रूप से न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ के समक्ष हुई घटना की निंदा की है। एसोसिएशन ने कहा कि सुनवाई के दौरान किसी भी पक्षकार द्वारा गाली-गलौज या धमकी भरी भाषा का प्रयोग करना कानून के शासन पर सीधा प्रहार है। बार एसोसिएशन ने जोर देकर कहा कि अदालती कार्यवाही के दौरान लोकतांत्रिक न्याय प्रणाली की आधारशिला यानी अनुशासन को किसी भी कीमत पर बनाए रखा जाना चाहिए।

वीडियो रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया पर सख्त गाइडलाइन की मांग

एससीबीए ने अदालत की कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग और उनके सोशल मीडिया पर अनियंत्रित प्रसार को रोकने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश बनाने की मांग की है। एसोसिएशन का तर्क है कि आजकल अदालत के वीडियो या उनके संपादित अंशों को संदर्भ से हटाकर सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है, जिससे तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है। इससे न केवल न्यायपालिका की छवि धूमिल होती है, बल्कि आम जनता के बीच भ्रम और अविश्वास की स्थिति भी पैदा होती है।

न्यायपालिका की साख बचाने के लिए सरकार से हस्तक्षेप की अपील

बार एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से भी इस मामले में तुरंत प्रशासनिक और कानूनी हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि ऐसे वीडियो क्लिप जिनका उद्देश्य अदालतों के प्रति लोगों के विश्वास को कमजोर करना है, उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने चाहिए। एससीबीए ने दोहराया कि न्यायपालिका का सम्मान सर्वोपरि है और इसकी पवित्रता बनाए रखने के लिए सभी पक्षों का सामूहिक सहयोग अत्यंत आवश्यक है।

Leave a Reply