मुंह की बदबू का कारण और बचाव, जानिए एक्सपर्ट्स के काम के टिप्स

मुंह से आने वाली अप्रिय दुर्गंध एक बेहद आम लेकिन उतनी ही संवेदनशील समस्या है। यह न केवल किसी व्यक्ति के आंतरिक आत्मविश्वास को कमजोर करती है, बल्कि सामाजिक मुलाकातों और पेशेवर जीवन (ऑफिस) में भी बेहद असहज स्थिति पैदा कर देती है। अक्सर देखा जाता है कि कई लोग दिन में दो बार नियमित रूप से ब्रश करने के बावजूद इस जिद्दी परेशानी से पूरी तरह छुटकारा नहीं पा पाते हैं।
लक्षण: केवल ओरल हाइजीन ही नहीं, पेट की खराबी और गंभीर बीमारियों का भी संकेत हो सकती है दुर्गंध
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सांसों की इस बदबू के पीछे केवल दांतों की ऊपरी सफाई में कमी होना ही एकमात्र कारण नहीं है। इसके पीछे जीभ की सतह पर हानिकारक बैक्टीरिया का जमा होना, मसूड़ों में अंदरूनी सूजन, पेट का साफ न होना (कब्ज), लार का कम बनना (मुंह का सूखापन) और गलत खानपान जैसे कई छिपे हुए कारण हो सकते हैं। यदि लंबे समय तक माउथ फ्रेशनर का इस्तेमाल करने के बाद भी यह समस्या ठीक न हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह शरीर के भीतर पनप रही किसी अन्य गंभीर बीमारी का प्रारंभिक लक्षण भी हो सकती है।
राहत की बात यह है कि दिनचर्या में कुछ बेहद आसान प्राकृतिक उपाय, सही ओरल हाइजीन (मुंह की स्वच्छता) और एक अनुशासित जीवनशैली को शामिल करके इस समस्या को काफी हद तक जड़ से खत्म किया जा सकता है।
चिकित्सीय भाषा में क्या है यह बीमारी और क्यों होती है?
चिकित्सा विज्ञान में मुंह से लगातार आने वाली इस खराब गंध को 'हैलिटोसिस' (Halitosis) के नाम से जाना जाता है। यह समस्या कुछ समय के लिए भी हो सकती है और कुछ मामलों में पुरानी व स्थायी भी हो सकती है। इसके मुख्य कारणों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
ओरल हाइजीन की कमी: दांतों के बीच फंसे अन्न कणों और जीभ की ठीक से सफाई न करना।
बैक्टीरियल इन्फेक्शन: मुंह के भीतर सूक्ष्म कीटाणुओं का तेजी से पनपना।
मसूड़ों के रोग: पायरिया या मसूड़ों में खून आने की पुरानी समस्या।
ड्राई माउथ: मुंह में पर्याप्त मात्रा में लार (सलाइवा) का निर्माण न होना।
व्यसन: लगातार धूम्रपान (स्मोकिंग) करना या तंबाकू-गुटखा चबाना।
तीखा खानपान: भोजन में कच्चे लहसुन, प्याज और अत्यधिक तीखे गर्म मसालों का सेवन।
पाचन तंत्र में गड़बड़ी: पेट में गैस बनना, एसिडिटी या कब्ज की पुरानी शिकायत।
कम पानी पीना: दिन भर में जरूरत से बेहद कम मात्रा में पानी का सेवन करना।
लंबे समय का उपवास: वजन घटाने या अन्य कारणों से बहुत देर तक खाली पेट रहना।
दांतों का सड़ना: दाढ़ या दांतों में गहरी कैविटी और अंदरूनी संक्रमण होना।
सांसों को हमेशा तरोताजा बनाए रखने के कुछ आसान और अचूक उपाय
नियमित सफाई: दिन में दो बार (सुबह और रात को सोने से पहले) फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से अच्छी तरह ब्रश करें।
टंग क्लीनिंग: ब्रश करने के साथ-साथ रोजाना टंग क्लीनर (जीभ साफ करने वाले) से जीभ की सतह को साफ करें।
फ्लॉसिंग: दांतों के बीच फंसे बारीक रेशों को निकालने के लिए हफ्ते में दो बार डेंटल फ्लॉस (विशेष धागे) का इस्तेमाल करें।
हाइड्रेशन: शरीर में पानी की कमी न होने दें, पूरे दिन भरपूर मात्रा में पानी पीते रहें ताकि मुंह में लार बनती रहे।
लार बढ़ाएं: मुंह के सूखेपन को दूर करने के लिए कभी-कभी शुगर-फ्री च्यूइंग गम चबाएं।
माउथवॉश: डेंटिस्ट की सलाह पर एक अच्छे एंटी-बैक्टीरियल माउथवॉश से कुल्ला करें।
बुरी आदतें छोड़ें: सिगरेट, बीड़ी और तंबाकू के सेवन से पूरी तरह दूरी बना लें।
कच्चा सलाद: अपने दैनिक भोजन में सेब, गाजर और हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करें, जो प्राकृतिक रूप से दांतों को साफ रखती हैं।
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सौंफ का सेवन: खाना खाने के तुरंत बाद थोड़ी सी हरी सौंफ चबाएं, यह एक बेहतरीन नेचुरल माउथ फ्रेशनर है।
हरी इलायची: मुंह का स्वाद और खुशबू बदलने के लिए एक या दो हरी इलायची मुंह में रखकर चूसें।
लौंग चबाना: दांतों के कीटाणु मारने और बदबू दूर करने के लिए मुंह में एक लौंग रखना फायदेमंद होता है।
नमक पानी के गरारे: रात को गुनगुने पानी में थोड़ा सा नमक डालकर कुल्ला (गरारे) करके सोएं।
ताजा नींबू पानी: सुबह के समय बिना शक्कर का नींबू पानी पीने से पेट साफ होता है और बदबू कम होती है।
पुदीने की पत्तियां: पुदीने के कुछ ताजे पत्तों को चबाने से सांसों में तुरंत ताजगी आ जाती है।
ओरल केयर के लिए इन बुनियादी बातों को कभी न भूलें
कभी भी रात को बिना ब्रश किए बिस्तर पर न जाएं।
हर 3 महीने की अवधि के भीतर अपने पुराने टूथब्रश को बदलकर नया ब्रश इस्तेमाल करें।
अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थ, चॉकलेट और वाइट शुगर खाने से बचें, क्योंकि ये बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं।
साल में कम से कम एक बार अपने नजदीकी दंत चिकित्सक (डेंटिस्ट) से ओरल चेकअप जरूर करवाएं।
विशेष नोट और डॉक्टर की सलाह
मुंह की दुर्गंध एक बेहद आम समस्या जरूर है, लेकिन इसे लंबे समय तक नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। यदि इन सभी घरेलू नुस्खों और सफाई के बाद भी बदबू लगातार बनी रहे, या इसके साथ मसूड़ों से मवाद (पस) आना, मसूड़ों का ढीला पड़ना, दांतों में तेज दर्द या पेट की कोई गंभीर बीमारी महसूस हो, तो बिना किसी लापरवाही के तुरंत किसी योग्य डॉक्टर या डेंटिस्ट से मिलकर इसका प्रॉपर इलाज शुरू करवाना चाहिए।
