कांग्रेस में बढ़ी अंदरूनी कलह, निधि का संगठन पर हमला, नोटिस पर उठाए सवाल

भोपाल: मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को लेकर छिड़ा आंतरिक विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब पार्टी की प्रदेश महासचिव निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने संगठन द्वारा की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को आड़े हाथों लेते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं। निधि ने पार्टी नेतृत्व से सीधा सवाल किया है कि आखिर दिग्विजय सिंह के खिलाफ कोई एक्शन क्यों नहीं लिया गया और केवल उन्हें ही निशाना बनाकर 'कारण बताओ नोटिस' क्यों जारी किया गया। उन्होंने बताया कि प्रदेश संगठन प्रभारी संजय कामले ने उन्हें 3 जुलाई को नोटिस थमाया था, जिसका प्रत्युत्तर वह 9 जुलाई को ही दर्ज करा चुकी हैं। अब इस जवाब को सार्वजनिक करते हुए उन्होंने पार्टी की इस कार्रवाई को पूरी तरह से एकतरफा और दुर्भावना से प्रेरित करार दिया है।

दिग्विजय के बयान पर चुप्पी को लेकर संगठन को घेरा

निधि चतुर्वेदी ने अपने लिखित जवाब में सीधे तौर पर कांग्रेस संगठन की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया है। उनका तर्क है कि जब पूरा प्रदेश नेतृत्व उज्जैन भूमि विवाद को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ आक्रामक अभियान चला रहा था और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर तीखे आरोप मढ़े थे, ठीक उसी वक्त दिग्विजय सिंह ने सार्वजनिक मंच से विपरीत राय जाहिर कर दी थी। दिग्विजय सिंह ने संबंधित ट्रस्ट को सरकारी बताकर पार्टी के पूरे अभियान की धार को कुंद कर दिया और प्रदेश नेतृत्व की स्थिति को असहज बना दिया। निधि का सवाल है कि यदि कांग्रेस में अनुशासन का पैमाना सभी नेताओं के लिए समान है, तो इतने बड़े नुकसानदेह बयान के बावजूद दिग्विजय सिंह से कोई स्पष्टीकरण क्यों नहीं मांगा गया और उनके खिलाफ कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया।

पुत्र मोह वाले बयान के बाद शुरू हुआ था विवाद

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब दिग्विजय सिंह के रुख से नाराज होकर निधि चतुर्वेदी ने उनके खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि पूर्व मुख्यमंत्री अपने पुत्र मोह के चक्कर में पूरी पार्टी और सांगठनिक हितों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने शीर्ष नेतृत्व से दिग्विजय सिंह पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की थी। इसी बयान को आधार बनाकर प्रदेश कांग्रेस ने निधि से स्पष्टीकरण मांगा था। अब निधि ने पलटवार करते हुए पूछा है कि जिस मूल विवादित बयान के खिलाफ उन्होंने आवाज उठाई, उस मुख्य मामले पर तो आलाकमान पूरी तरह मौन साधे हुए है, लेकिन सच बोलने वाले को ही नोटिस थमाकर दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

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