रूस से नहीं लौटा बेटा, वर्दी का हुआ अंतिम संस्कार; परिजनों ने एजेंट के लिए मांगी फांसी

आजमगढ़: जिले के कंधरापुर थाना क्षेत्र के खोजापुर माधोपट्टी गांव के निवासी योगेंद्र यादव के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। रूस में नौकरी के सिलसिले में गए योगेंद्र यादव की युद्ध के दौरान मृत्यु हो गई। विडंबना यह है कि विस्फोट में शरीर के चिथड़े उड़ जाने के कारण परिजनों को उनके पार्थिव शरीर के अवशेष तक नसीब नहीं हुए। अंत में, प्रशासन द्वारा सौंपी गई उनकी सेना की वर्दी को ही चिता पर रखकर परिजनों ने अंतिम संस्कार किया।
एजेंट के झांसे में आकर गए थे रूस
योगेंद्र के छोटे भाई आशीष यादव ने बताया कि मऊ के रहने वाले एक एजेंट ने उनके भाई को सुरक्षा गार्ड की नौकरी का लालच दिया था। 15 जनवरी 2024 को योगेंद्र तीन एजेंटों—विनोद, सुमित और दुष्यंत—के साथ रूस गए थे। वहां पहुंचने के कुछ ही समय बाद उन्हें एक महीने की सैन्य ट्रेनिंग देकर जबरन युद्ध के मोर्चे पर भेज दिया गया। मई 2024 से ही उनका परिवार से संपर्क पूरी तरह टूट गया था। अंतिम बार जब बात हुई थी, तब योगेंद्र ने बताया था कि 9 मई को युद्ध के दौरान उन्हें चोट लगी है।
नहीं मिले पार्थिव अवशेष, वर्दी का किया अंतिम संस्कार
परिवार ने एंबेसी से लेकर रूस तक अपने स्तर से खोजबीन की, लेकिन कोई ठोस जानकारी हाथ नहीं लगी। हाल ही में, परिवार को फोन पर सूचना दी गई कि विस्फोट में योगेंद्र का शरीर पूरी तरह नष्ट हो गया है, इसलिए कोई भी कंकाल या पार्थिव अवशेष नहीं मिल पाएगा। जिला प्रशासन द्वारा भेजी गई उनकी वर्दी को लेकर परिजन चंद्रमा ऋषि आश्रम पहुंचे, जहाँ उन्होंने पूरे विधि-विधान से उनकी वर्दी का ही अंतिम संस्कार किया।
शहीद का दर्जा और न्याय की गुहार
योगेंद्र यादव के घर पर शोक की लहर है। पीछे वे अपने परिवार में चार बच्चों—तीन बेटियों और एक बेटे—को छोड़ गए हैं। घर पर लगी उनकी तस्वीर पर आसपास के लोगों ने उन्हें 'शहीद' का दर्जा देते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। शोकाकुल परिजनों ने सरकार से मांग की है कि ऐसे धोखेबाज एजेंटों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए और उन्हें फांसी की सजा दी जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार का मुखिया इस तरह न छीना जाए।
