संघर्ष से सफलता तक: गाड़िया लुहार समाज के सुनील ने NEET में दर्ज की ऐतिहासिक उपलब्धि

सीकर: राजस्थान के सीकर जिले स्थित रींगस कस्बे से संघर्ष, हौसले और दृढ़ संकल्प की एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। वार्ड नंबर-12 निवासी सुनील गाड़िया लुहार ने अत्यधिक आर्थिक तंगी, पारिवारिक जिम्मेदारियों और अपने छह महीने के मासूम बच्चे को खोने के असहनीय दुख के बावजूद हार नहीं मानी। उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में 593 अंक प्राप्त कर ओबीसी वर्ग में 5,680वीं रैंक हासिल की है। सुनील की इस अभूतपूर्व उपलब्धि से गाड़िया लुहार समाज में खुशी की लहर दौड़ गई है और खंडेला विधायक सुभाष मील ने उनके घर पहुंचकर इस भावी चिकित्सक को सम्मानित किया।

विधायक ने घर पहुंचकर किया मेधावी का सम्मान

सुनील की इस बड़ी सफलता की खबर मिलते ही खंडेला विधायक सुभाष मील जैतूसर रोड स्थित उनके निवास स्थान पहुंचे। विधायक ने पारंपरिक साफा पहनाकर और श्याम दुपट्टा ओढ़ाकर सुनील का अभिनंदन किया। इसके साथ ही उन्होंने माता-पिता को मिठाई खिलाकर बधाई दी और कहा कि विषम परिस्थितियों से निकलकर हासिल की गई यह सफलता क्षेत्र के सभी युवाओं के लिए एक अनुकरणीय मिसाल है। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि और कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कबाड़ बीनने से लेकर डॉक्टर बनने तक का कठिन सफर

सुनील का सफलता तक पहुँचने का मार्ग चुनौतियों से भरा रहा। परिवार की दयनीय आर्थिक स्थिति के कारण वे लंबे समय तक अपने पिता के साथ घर-घर जाकर कबाड़ एकत्र करने का कार्य करते थे। उन्होंने अपनी शिक्षा के साथ-साथ पारिवारिक दायित्वों को भी बखूबी निभाया और हर परिस्थिति में पिता का संबल बने रहे। प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्होंने डिजिटल दुनिया और मोबाइल से पूरी दूरी बनाकर केवल अपनी अध्ययन सामग्री पर ध्यान केंद्रित किया।

मासूम बेटे को खोने का दर्द ही बना सबसे बड़ी ताकत

लगभग सात माह पूर्व उचित चिकित्सा सुविधा के अभाव और बीमारी के कारण सुनील के छह महीने के पुत्र का देहांत हो गया था। यह वज्रपात किसी भी व्यक्ति को मानसिक रूप से तोड़ सकता था, परंतु सुनील ने इस अपार दुख को अपनी सबसे बड़ी शक्ति बना लिया। उनका संकल्प है कि वे एक योग्य चिकित्सक बनकर जरूरतमंद और असहाय लोगों का निशुल्क व बेहतर इलाज करेंगे ताकि किसी अन्य परिवार को समय पर इलाज न मिलने का दंश न झेलना पड़े।

पूरे समाज के लिए बनी यह उपलब्धि एक बड़ी प्रेरणा

सुनील के पिता भगवान सहाय लोहार और माता सिकरी देवी ने इस ऐतिहासिक क्षण पर अत्यंत गर्व व्यक्त किया। पारंपरिक व्यवसाय में संलग्न रहने वाले गाड़िया लुहार समाज के लिए सुनील का यह प्रयास एक रूढ़िवादी सोच को बदलने वाला कदम साबित हो रहा है। परिवार और परिजनों का मानना है कि सुनील की यह उपलब्धि आने वाली नई पीढ़ियों को शिक्षा के प्रति जागरूक करेगी और विषम परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करेगी।

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