एक तरफ धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, दूसरी तरफ मायावती का बड़ा राजनीतिक संदेश

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET UG) परीक्षा और पेपर लीक के मामलों को लेकर धरने पर बैठे छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े रहने को एक 'जिद्दी मांग' करार दिया है। इसके साथ ही, उन्होंने अपने सभी पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को मौजूदा राजनीतिक हालात को लेकर पूरी तरह सजग और सतर्क रहने की सख्त हिदायत दी है।

विपक्षी दलों पर राजनीतिक लाभ लेने का गंभीर आरोप

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर सिलसिलेवार पोस्ट साझा करते हुए मायावती ने कहा कि देश भर के विभिन्न विपक्षी दलों में केवल अपने राजनीतिक हितों और चुनावी लाभ को साधने के लिए सड़क से लेकर संसद तक एक-दूसरे से होड़ मची हुई है।

  • आंदोलन के हिंसक होने की आशंका: उन्होंने चिंता जताई कि विपक्षी पार्टियों की इस खींचतान के कारण अब यह छात्र आंदोलन धीरे-धीरे हिंसक रूप लेकर फैलता जा रहा है, जो देश के हित में नहीं है।

  • कार्यकर्ताओं को निर्देश: इस संवेदनशील राजनीतिक स्थिति में बसपा के सभी कार्यकर्ताओं को उग्र, निराश या हताश होने के बजाय अपने पार्टी मिशन के प्रति पूरी लगन, तन, मन और धन के साथ अडिग भाव से डटे रहने की जरूरत है।

असली मुद्दों से भटक रहा है देश का ध्यान

पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपने संदेश में यह भी स्पष्ट किया कि नीट-यूजी सहित देश भर में हो रही विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने और इसके तनाव के कारण परीक्षार्थियों द्वारा आत्महत्या जैसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं से उपजे हालात में इस आंदोलन को आम जनमानस की गहरी सहानुभूति अवश्य प्राप्त है।

हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकारी जवाबदेही के नाम पर केवल केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़े रहने की जिद के कारण इस समय विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच केवल राजनीतिक रोटियां सेकी जा रही हैं। इस तू-तू मैं-मैं के चक्कर में देश की शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक और बुनियादी सुधार किए जाने का जो सबसे असली और महत्वपूर्ण मुद्दा है, वह पूरी तरह से पीछे छूटता जा रहा है और जनता का ध्यान भटकाया जा रहा है।

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