ईजीमेल्ट तकनीक अपनाएगा टाटा स्टील, ₹2500 करोड़ के निवेश से घटेगी कोक की खपत

जमशेदपुर:देश की प्रमुख इस्पात निर्माता कंपनी टाटा स्टील ने अपने जमशेदपुर वर्क्स में कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए 2,500 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश की घोषणा की है। इस निवेश के माध्यम से कंपनी अपने ब्लास्ट फर्नेस में दुनिया की अत्याधुनिक ईजीमेल्ट तकनीक स्थापित करने जा रही है, जिससे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नया मील का पत्थर साबित होने की उम्मीद है।
एसएमएस ग्रुप के सहयोग से शुरू होगी दुनिया की पहली औद्योगिक परियोजना
लक्जमबर्ग की प्रतिष्ठित कंपनी एसएमएस ग्रुप के तकनीकी सहयोग से शुरू होने वाली यह महत्वाकांक्षी परियोजना दुनिया भर में इस विशेष तकनीक की अपनी तरह की पहली औद्योगिक पैमाने की प्रदर्शनी होगी। इस आधुनिक प्रणाली के लागू होने से ब्लास्ट फर्नेस में कोयले से तैयार होने वाले ईंधन यानी कोक की खपत में लगभग 50 प्रतिशत तक की भारी कमी आएगी।
ईजीमेल्ट तकनीक की अनूठी कार्यप्रणाली और विशेषता
ईजीमेल्ट यानी इलेक्ट्रिकली-असिस्टेड सिनगैस स्मेल्टर एक बेहद उन्नत और आधुनिक तकनीक है, जो ब्लास्ट फर्नेस से बाहर निकलने वाली अपशिष्ट यानी वेस्ट गैसों को उपयोगी ऊर्जा और मूल्यवान रासायनिक एजेंटों में सफलतापूर्वक परिवर्तित कर देती है। यह पूरी प्रणाली मुख्य रूप से तीन प्रमुख प्रक्रियाओं – ड्राई रिफॉर्मिंग, शाफ्ट इंजेक्शन और ट्यूयर इंजेक्शन को आपस में एकीकृत कर काम करती है।
हरित इस्पात उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक पहल
कंपनी का यह कदम वैश्विक स्तर पर बढ़ते जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने और हरित इस्पात उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। इस तकनीक के सफल क्रियान्वयन से न केवल ऊर्जा की बचत होगी, बल्कि इस्पात निर्माण के दौरान पर्यावरण में फैलने वाले कार्बनिक प्रदूषण में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जाएगी।
