DCP संदीप लांबा को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत, ट्रांसफर की मांग खारिज

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में सुनवाई करते हुए एक प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर महिला को थप्पड़ मारने वाले डीसीपी संदीप लांबा का अन्यत्र स्थानांतरण किए जाने की मांग को लेकर दायर की गई याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अदालत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए याचिकाकर्ता को यह सख्त हिदायत भी दी है कि वह इस तरह के मामलों को तूल देकर न्यायपालिका या कानून प्रवर्तन जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं की अनावश्यक बदनामी करना तत्काल प्रभाव से बंद कर दें।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था थप्पड़ मारने का वीडियो

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान डीसीपी संदीप लांबा का एक महिला के साथ तीखी बहस के बाद उसे थप्पड़ मारते हुए का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया था। इस घटना के सामने आने के बाद विभिन्न हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं और पुलिस अधिकारी के इस गैर-पेशेवर आचरण की चौतरफा तीखी आलोचना भी की गई थी, जिसके चलते यह मामला कानूनी पटल पर पहुंचा था।

कानून के तहत कार्रवाई की बात और निष्पक्षता पर जोर

सुनवाई के दौरान अदालत ने अपनी मौखिक टिप्पणी में यह स्पष्ट किया कि यदि संबंधित अधिकारी द्वारा अपने कर्तव्य के दौरान कुछ भी गलत किया गया है, तो उन्हें कानून के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार उसके परिणाम निश्चित रूप से भुगतने ही होंगे। हालांकि, अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि बिना किसी विधिवत एवं निष्पक्ष सुनवाई और ठोस जांच के यह पूर्वाग्रह नहीं बनाया जा सकता कि आरोपी अधिकारी पूर्ण रूप से दोषी ही है।

निगरानी और कार्य वापस लेने से अदालत का इनकार

अदालत ने याचिकाकर्ता की इस मांग को भी अस्वीकार कर दिया जिसमें अधिकारी की वर्तमान कार्यप्रणाली और उनकी निगरानी से कामकाज वापस लिए जाने की गुहार लगाई गई थी। न्यायपीठ ने स्पष्ट किया कि केवल आरोपों के आधार पर बिना दोष साबित हुए प्रशासनिक निर्णयों में इस तरह का हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है, जिसके बाद कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए मामले का निपटारा कर दिया।

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