भारत का सबसे ‘अनबीटन’ कप्तान, टेस्ट-ODI में नहीं मिली एक भी हार, फिर भी रहे सुर्खियों से दूर

मुंबई| जब अजिंक्य रहाणे ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा की, तो केवल एक शानदार बल्लेबाज का करियर समाप्त नहीं हुआ, बल्कि भारतीय क्रिकेट के सबसे शांत, भरोसेमंद और अनुशासित अध्यायों में से एक का गरिमामयी अंत भी हो गया। संन्यास लेते समय उन्होंने कहा था, 'मैंने हमेशा अपने देश और टीम को खुद से ऊपर रखा।' शायद यही एक वाक्य उनके पूरे खेल जीवन और व्यक्तित्व का सबसे सटीक परिचय है। डोंबिवली की लोकल ट्रेन से रोज सफर करने वाला एक साधारण सा लड़का आगे चलकर एक ऐसा कप्तान बना, जिसकी अगुवाई में भारतीय टीम टेस्ट और वनडे में एक भी मैच नहीं हारी और ऑस्ट्रेलिया में क्रिकेट इतिहास की सबसे यादगार व ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

डोंबिवली से शुरू हुआ सपना, पिता के संघर्ष की कहानी

6 जून 1988 को महाराष्ट्र के अश्वी में जन्मे अजिंक्य रहाणे का परिवार बेहतर भविष्य की तलाश में डोंबिवली आकर बस गया था। शुरुआती आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। उनकी मां सुजाता रहाणे बच्चों की देखभाल करती थीं, जबकि पिता मधुकर रहाणे ने बेटे के क्रिकेट के सपने को पूरा करने के लिए हर संभव त्याग किया। महज सात साल की उम्र में उन्हें एक स्थानीय क्रिकेट अकादमी में दाखिल कराया गया। पहले दिन उनके पिता उन्हें लोकल ट्रेन से अकादमी लेकर गए, लेकिन दूसरे दिन उन्होंने कहा कि अब तुम्हें अकेले सफर करना होगा।

रहाणे कई वर्षों तक यही सोचते रहे कि वे रोजाना अकेले ही अकादमी जाते हैं, लेकिन पांच-छह साल बाद उन्हें पता चला कि उनके पिता हर रोज दूसरे डिब्बे में बैठकर चुपचाप उनका पीछा करते थे, ताकि बेटे का आत्मविश्वास भी बना रहे और उसकी सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके। यह सच्चाई जानकर रहाणे भावुक हो गए और उन्होंने उसी दिन यह ठान लिया कि उनकी जिंदगी की हर बड़ी उपलब्धि सबसे पहले उनके माता-पिता को समर्पित होगी।

घरेलू क्रिकेट में मजबूत नींव और रिकॉर्ड्स

  • रहाणे ने वर्ष 2007 में मुंबई के लिए प्रथम श्रेणी (फर्स्ट क्लास), लिस्ट-ए और टी20 क्रिकेट में पदार्पण किया और अपनी तकनीकी रूप से मजबूत बल्लेबाजी से जल्द ही खास पहचान बनाई।

  • रणजी ट्रॉफी के अपने दूसरे ही सीजन में उन्होंने 1000 से अधिक रन बनाकर मुंबई को रिकॉर्ड 38वां खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

  • प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 190 से अधिक मुकाबले खेलकर उन्होंने 13 हजार से ज्यादा रन बनाए और लगभग 46.5 की शानदार औसत से 39 शतक जड़े।

  • वर्ष 2022-23 के सत्र में उनकी कप्तानी में मुंबई ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया, जो घरेलू क्रिकेट में उनके बेहतरीन नेतृत्व का प्रमाण था।

2013 में टेस्ट डेब्यू और विदेशी धरती पर शानदार प्रदर्शन

घरेलू सर्किट में लगातार रनों का अंबार लगाने के बाद रहाणे को वर्ष 2013 में भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया गया। दिल्ली में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने अपना टेस्ट डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने विदेशी धरती पर अपनी बल्लेबाजी का ऐसा लोहा मनवाया कि दुनिया भर के गेंदबाजों में उनका खौफ हो गया:

  • लॉर्ड्स का ऐतिहासिक शतक: फरवरी 2014 में वेलिंगटन में पहला टेस्ट शतक लगाने के कुछ ही महीनों बाद, उन्होंने प्रतिष्ठित लॉर्ड्स टेस्ट की पहली पारी में 103 रनों की शानदार शतकीय पारी खेली, जिसकी बदौलत भारत ने लगभग तीन दशक बाद लॉर्ड्स के मैदान पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

  • साउथ अफ्रीका और अन्य दौरे: 2015-16 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दिल्ली टेस्ट की दोनों पारियों में शतक जड़कर उन्होंने साबित कर दिया कि वह मुश्किल पिचों के सबसे बड़े खिलाड़ी हैं।

36 रन के सदमे के बाद मेलबर्न में रचा इतिहास

दिसंबर 2020 में एडिलेड टेस्ट की दूसरी पारी में भारतीय टीम मात्र 36 रन पर सिमट गई थी। इस शर्मनाक हार और नियमित कप्तान विराट कोहली के पितृत्व अवकाश पर स्वदेश लौटने के बाद कप्तानी की बड़ी जिम्मेदारी अजिंक्य रहाणे के कंधों पर आ गई। ऐसे बेहद कठिन समय में उन्होंने मेलबर्न टेस्ट में एक जिम्मेदार कप्तान की तरह शतकीय पारी खेली। उनकी इस प्रेरणादायक पारी ने पूरी टीम का मनोबल वापस लौटाया और भारत ने युवा व चोटिल खिलाड़ियों से सजी टीम के साथ ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर 2-1 से हराकर बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया।

आईपीएल और टी20 में बदला हुआ आक्रामक अंदाज

पारंपरिक और शास्त्रीय तकनीक के बल्लेबाज माने जाने वाले रहाणे ने टी20 क्रिकेट में समय के साथ खुद को पूरी तरह ढाला। राजस्थान रॉयल्स के लिए कई यादगार पारियां खेलने के बाद, आईपीएल 2023 में चेन्नई सुपर किंग्स की तरफ से खेलते हुए उन्होंने अपनी बल्लेबाजी में गजब की आक्रामकता दिखाई और 172 से अधिक के स्ट्राइक रेट से रन बनाए। इसके बाद कोलकाता नाइट राइडर्स ने उन्हें आईपीएल 2025 और 2026 के लिए टीम की कप्तानी सौंपी।

सादगी भरी प्रेम कहानी

क्रिकेट के मैदान की तरह रहाणे की व्यक्तिगत जिंदगी भी पूरी तरह सादगी से भरी रही है। मुलुंड की रहने वाली राधिका धोपावकर उनकी बहन की सहेली थीं। ऑरकुट के दौर से शुरू हुई उनकी बातचीत धीरे-धीरे प्यार में बदली और सात साल तक चले रिश्ते के बाद 26 सितंबर 2014 को दोनों ने पारंपरिक मराठी रीति-रिवाज से विवाह किया। अपनी शादी के दिन भी सादगी की मिसाल पेश करते हुए वह टी-शर्ट और जींस पहनकर ही मंडप पहुंच गए थे, जिन्हें बाद में राधिका के कहने पर कपड़े बदलकर शेरवानी पहननी पड़ी थी।

कप्तान के रूप में स्वर्णिम रिकॉर्ड

अजिंक्य रहाणे केवल एक भरोसेमंद बल्लेबाज ही नहीं, बल्कि बेहद शांत और दूरदर्शी कप्तान भी रहे। उनकी कप्तानी का रिकॉर्ड गवाह है कि उन्होंने जितने भी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भारत का नेतृत्व किया, टीम का प्रदर्शन हमेशा सर्वोपरि रहा:

  • टेस्ट क्रिकेट में 2017 से 2021 के बीच 6 मैचों में उन्होंने कप्तानी की, जिसमें 4 में भारत को जीत मिली, 2 मुकाबले ड्रॉ रहे और टीम को एक भी मैच में हार का सामना नहीं करना पड़ा।

  • वनडे में उन्होंने 3 मैचों में कप्तानी की और तीनों में भारत विजयी रहा।

अजिंक्य रहाणे की अमिट विरासत

अपने शानदार करियर के दौरान अजिंक्य रहाणे ने 15 अंतरराष्ट्रीय शतक लगाए और 8,000 से अधिक रन बनाकर कई ऐतिहासिक जीतों की इबारत लिखी। लेकिन उनकी सबसे बड़ी ताकत उनके आंकड़े नहीं, बल्कि उनका बेदाग चरित्र और असाधारण संयम रहा। उन्होंने कभी असफलताओं का शोर नहीं मचाया और न ही कभी सुर्खियों के पीछे भागे, बल्कि हर बार जब टीम संकट में थी, वह सबसे आगे दीवार बनकर खड़े मिले। डोंबिवली की लोकल ट्रेन से शुरू हुआ यह सफर ऑस्ट्रेलिया की गाबा विजय तक पहुंचा, और रहाणे हमेशा भारतीय क्रिकेट में धैर्य, सादगी और नेतृत्व के सबसे बड़े प्रतीक के रूप में याद किए जाएंगे।

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