कुलगाम हमले पर सियासत से ऊपर उठकर राहुल गांधी का बयान, दोषियों को सजा देने की अपील

श्रीनगर| लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में हुए एक कायराना आतंकी हमले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है। इस दुर्दांत आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ राज्य से आए दो निर्दोष प्रवासी मजदूरों की असमय मौत हो गई है। राहुल गांधी ने इस पूरी घटना को "बेहद दुखद और झकझोर देने वाला" करार देते हुए इन हमलों के दोषियों के खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई करने और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलाए जाने की पुरजोर मांग की है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर अपने आधिकारिक हैंडल से पोस्ट करते हुए लिखा, "जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में हुए इस दुस्साहसी आतंकी हमले में हमारे देश के दो गरीब श्रमिकों की हत्या अत्यंत दुखद है। इस कठिन समय में मैं शोकाकुल परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूँ। आतंकवादियों द्वारा किए गए इस कायराना कृत्य के लिए उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो एक मिसाल बने। आतंकवाद के इस नासूर के खिलाफ पूरा देश हमेशा एकजुट खड़ा है।"

आखिर कुलगाम में कैसे अंजाम दिया गया यह आतंकी हमला?

प्राप्त विवरण के अनुसार, यह खौफनाक आतंकी हमला बीते शुक्रवार की शाम कुलगाम जिले के केल्लम गांव में घटित हुआ था। छिपे हुए आतंकवादियों ने छत्तीसगढ़ के रहने वाले दो ईंट-भट्ठा मजदूरों पर अचानक अंधाधुंध गोलीबारी कर दी, जिससे दोनों गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। आनन-फानन में स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से दोनों घायलों को इलाज के लिए अनंतनाग स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) अस्पताल पहुँचाया गया।

इन घायलों में से एक मजदूर दीपक की शुक्रवार की रात इलाज के दौरान अस्पताल में ही मौत हो गई थी, जबकि दूसरे घायल मजदूर बोपिंदर की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर और उच्च स्तरीय उपचार के लिए श्रीनगर स्थित प्रतिष्ठित 'शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज' (SKIMS), सौरा रेफर किया गया था। वहाँ इलाज के दौरान शनिवार की सुबह उन्होंने भी दम तोड़ दिया।

विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने की हमले की घोर निंदा

इन दोनों बेकसूर प्रवासी मजदूरों की निर्मम हत्या की स्थानीय स्तर पर विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और धार्मिक नेताओं ने भी एक सुर में कड़ी भर्त्सना की है। नेताओं ने इस हमले को निहत्थे नागरिकों पर किया गया एक अमानवीय और घृणित कृत्य बताया है। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से 10-10 लाख रुपये की बड़ी अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।

घाटी में हाल के दिनों में बढ़े हैं इस तरह के लक्षित हमले

सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह आतंकी हमला 22 जुलाई को अनंतनाग में अमरनाथ यात्रा के दौरान सुरक्षा ड्यूटी में तैनात हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की आतंकवादियों द्वारा की गई हत्या की घटना के दो सप्ताह के भीतर ही सामने आया है। इस तरह की हालिया वारदातों के बाद से सुरक्षा बलों और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सभी प्रवासी श्रमिकों के ट्रांजिट कैंपों, रिहायशी इलाकों और अन्य संवेदनशील ठिकानों पर सुरक्षा व्यवस्था व गश्त को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और वहां काम कर रहे लोगों की सुरक्षा पुख्ता की जा सके।

वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों के दौरान आतंकवादी सुरक्षा बलों, प्रमुख राजनीतिक कार्यकर्ताओं और न्यायाधीशों को निशाना बनाने में विफल रहने के बाद अब घाटी में रह रहे प्रवासी मजदूरों, रेहड़ी-पटरी वालों तथा आम चालकों जैसे निहत्थे नागरिकों को अपना आसान निशाना बना रहे हैं। इस तरह के कायराना हमलों के पीछे उनका मुख्य उद्देश्य कश्मीर घाटी में एक बार फिर से भय और आतंक का माहौल पैदा करना तथा सामान्य जनजीवन को बाधित करना है।

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