पीड़ितों से मिले सांसद, बोले- पुलिसकर्मियों के साथ SP की भी तय हो जिम्मेदारी

सीवान। बिहार के सीवान जिले में बीते 25 जुलाई को आयोजित बंद और प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा AK-47 राइफल से गोलीबारी किए जाने का मामला लगातार गहराता जा रहा है। गांधी मैदान और जेपी चौक पर छात्रों एवं पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद यह घटना तूल पकड़ चुकी है। सड़क से लेकर विधानसभा तक इस मुद्दे को लेकर हंगामा मचा हुआ है, जिसकी वास्तविक स्थिति और तथ्यों का जायजा लेने के लिए कांग्रेस का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल सीवान पहुंचा है।
प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा और गोलीबारी
25 जुलाई को आहूत बंद के दौरान सुबह तक स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण बनी हुई थी, लेकिन दोपहर के समय अचानक बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी गांधी मैदान में जमा होने लगे। पुलिस और छात्रों के बीच हुई तीखी बहस के बाद माहौल बिगड़ गया और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे गए। इसके बाद भड़की हिंसा में पथराव शुरू हो गया, जिसमें कई पुलिसकर्मी चोटिल हो गए और तीन छात्रों को गोलियां लग गईं।
AK-47 का वीडियो वायरल होने पर सिपाही निलंबित
घटना के दौरान पुलिस बल द्वारा स्वचालित हथियार AK-47 से फायरिंग करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए और राज्य विधानसभा में उठे भारी हंगामे के बाद आनन-फानन में गोली चलाने वाले पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया। हालांकि, विपक्षी दल इस दंडात्मक कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने घायलों से की मुलाकात
सत्यता का पता लगाने सीवान पहुंचे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में सांसद इमरान प्रतापगढ़ी समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। टीम ने अस्पताल जाकर गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल हुए छात्र आरिफ और आकाश से मुलाकात की और घटनाक्रम की पूरी जानकारी ली। घायलों का हालचाल जानने के बाद नेताओं ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
शीर्ष अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग
मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि महज एक निचले स्तर के सिपाही को निलंबित करके इतनी बड़ी घटना से पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि भीड़ पर AK-47 जैसी घातक राइफल से गोलियां चलाने का आदेश किसने दिया था। उन्होंने मांग की कि यदि जांच में जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) की भूमिका या लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
