प्रह्लाद जोशी पर अभिजीत दीपके का निशाना, शिक्षा मंत्रालय को लेकर उठाए सवाल

नई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) पेपर लीक मामले को लेकर देश भर में हुए चौतरफा विरोध प्रदर्शनों के बीच पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने के बाद सरकार ने प्रह्लाद जोशी को देश का नया शिक्षा मंत्री नियुक्त किया है। इस नए प्रशासनिक बदलाव पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। अभिजीत दीपके ने कहा कि अभ्यर्थियों और आम जनता की प्राथमिक मांग तात्कालिक शिक्षा मंत्री के त्यागपत्र को लेकर थी, जिसे स्वीकार तो कर लिया गया, किंतु उनके स्थान पर नव-नियुक्त मंत्री की पृष्ठभूमि और पुराने आचरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे फैसलों से शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों और छात्राओं के बीच अत्यंत निराशाजनक संदेश जाता है।
पेपर लीक के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के पीड़ित परिवारों के लिए एक-एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग
सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने नीट धांधली प्रकरण के बाद मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या करने वाले लगभग 20 विद्यार्थियों के परिजनों की आर्थिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने मांग रखी कि सरकार प्रभावित और पीड़ित परिवारों को अविलंब एक-एक करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान करे। दीपके ने आरोप लगाया कि खबर आ रही है कि प्रशासन मुआवजा वितरित करने की प्रक्रिया में नियमों और विभिन्न मानदंडों का हवाला देकर टालमटोल कर रहा है। उन्होंने कहा कि अनेक पीड़ित परिवार शिक्षा ऋण और कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं, ऐसे में सरकार को बिना किसी प्रशासनिक देरी के सीधे राहत राशि जारी करनी चाहिए।
प्रशासनिक रवैये पर कसा तंज, कहा- राजनीतिक फैसलों में नहीं रुकते काम तो पीड़ितों की मदद में क्यों देरी
सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि जब देश में राजनीतिक उठापटक या सरकारें बनाने-बनाने की स्थिति होती है, तब कोई प्रशासनिक नियम या वित्तीय मानदंड आड़े नहीं आते। बड़े राजनीतिक फैसलों को रातों-रात लागू कर दिया जाता है, किंतु जब किसी संकटग्रस्त पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद देने का विषय आता है तो व्यवस्था को अचानक नियमों की याद आ जाती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का दोहरा रवैया सरकार की मंशा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है और यह दर्शाता है कि आम नागरिकों की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता की भारी कमी है।
मांगों की अनदेखी पर दी बड़े जनआंदोलन की चेतावनी, कहा- राहत मिलने तक जारी रहेगा संघर्ष
संबोधन के अंतिम चरण में अभिजीत दीपके ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि बहानेबाजी बंद करके पीड़ित परिवारों की मांगों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक नीट प्रभावित अभ्यर्थियों और उनके परिजनों को न्याय तथा उचित मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक उनका संगठन शांत नहीं बैठेगा। यदि शासन द्वारा शीघ्र ही इस दिशा में ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो वे एक बार फिर सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे और जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, वे पीछे नहीं हटेंगे।
