MP में शुरू होगा सेमीकंडक्टर का नया युग, प्रदेश बनेगा इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र

भोपाल। मध्य प्रदेश अब पारंपरिक उद्योगों के दायरे से बाहर निकलकर देश के सेमीकंडक्टर उद्योग का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। राज्य सरकार ने राज्य को भारत का सेमीकंडक्टर हब बनाने की व्यापक रणनीति तैयार की है, ताकि माइक्रोचिप के आयात पर देश की निर्भरता घटे और उच्च तकनीक विनिर्माण को गति मिले। इस उद्देश्य से वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने, अत्याधुनिक औद्योगिक अधोसंरचना तैयार करने और आसान मंजूरी व्यवस्था बनाने की योजना पर काम चल रहा है। इसी सिलसिले में भोपाल या इंदौर में जल्द ही एक वैश्विक स्तर का निवेशक संवाद आयोजित किया जाएगा।
आधुनिक तकनीक की रीढ़ है सेमीकंडक्टर चिप और मध्य प्रदेश की रणनीतिक स्थिति
आज मोबाइल, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल, रक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे हर आधुनिक क्षेत्र में सेमीकंडक्टर चिप का इस्तेमाल अनिवार्य हो गया है। वैश्विक चिप संकट से सीख लेते हुए भारत ने 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' की शुरुआत की है, जिसमें मध्य प्रदेश अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभर सकता है। राज्य के पास दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, बेहतर रेल-सड़क नेटवर्क, पर्याप्त बिजली-पानी तथा सस्ती औद्योगिक भूमि जैसे कई अनुकूल कारक मौजूद हैं। सरकार की योजना एक माह के भीतर भूमि आवंटन और सभी अनुमतियां प्रदान करने की है।
भोपाल या इंदौर में ग्लोबल इन्वेस्टर डायलॉग का आयोजन और पहला बड़ा निवेश
राज्य सरकार भोपाल अथवा इंदौर में 'ग्लोबल सेमीकंडक्टर इन्वेस्टमेंट डायलॉग' आयोजित करने जा रही है, जिसमें अमेरिका, जापान, ताइवान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर जैसी तकनीकी दिग्गजों को आमंत्रित किया जाएगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेलवेंद्रन के अनुसार, इस सम्मेलन में निवेशकों को राज्य की नीतियों और वित्तीय प्रोत्साहनों की जानकारी दी जाएगी। मध्य प्रदेश की इस योजना को पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज लिमिटेड द्वारा 4,200 करोड़ रुपये के निवेश से ओएसएटी (OSAT) इकाई स्थापित करने के एमओयू से बड़ा समर्थन मिला है।
कुशल मानव संसाधन तैयार करने की चुनौती और सिंगल विंडो क्लीयरेंस
सेमीकंडक्टर उद्योग की आवश्यकताओं को देखते हुए सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी संस्थानों के समन्वय से युवाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार कर रही है। इसके साथ ही, निवेशकों को विभिन्न दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए सिंगल विंडो व्यवस्था के तहत पर्यावरण, अग्नि सुरक्षा और अन्य अनुमतियां निश्चित समय सीमा के भीतर दी जाएंगी, ताकि विनिर्माण प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू हो सके।
रोजगार सृजन और राज्य की अर्थव्यवस्था पर व्यापक सकारात्मक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि सेमीकंडक्टर उद्योग के विकास से राज्य में केवल चिप निर्माण ही नहीं होगा, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, अनुसंधान, और स्थानीय स्टार्टअप्स को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इससे हजारों प्रत्यक्ष और लाखों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। गुजरात, असम और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर यदि मध्य प्रदेश की यह योजना समय पर धरातल पर उतरती है, तो राज्य ऑटोमोबाइल और फार्मा के साथ-साथ हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स का भी एक प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र बन जाएगा।
