48 अधिकारी-कर्मचारी मिले अनुपस्थित, दमोह कलेक्टर ने वेतन कटौती के दिए निर्देश

दमोह| मध्य प्रदेश के दमोह जिले में सरकारी कामकाज और प्रशासनिक कार्यों में लापरवाही बरतने वाले लापरवाह अमले के लिए सोमवार का दिन बेहद भारी साबित हुआ। जिला कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने अलसुबह करीब पाँच प्रमुख सरकारी विभागों का औचक (अचानक) निरीक्षण किया, जिसमें कुल 48 अधिकारी और कर्मचारी अपने निर्धारित समय पर कार्यालय से नदारद पाए गए। इस गंभीर अनियमितता पर कड़ा रुख अपनाते हुए कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से सभी अनुपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटने का कड़ा आदेश जारी किया है। सरकारी दफ्तरों में समयबद्धता और आम जनता के प्रति प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में इस बड़ी कार्रवाई को एक कड़ा कदम माना जा रहा है।
कलेक्टर के औचक निरीक्षण से मचा हड़कंप
सोमवार की सुबह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बिना किसी पूर्व सूचना के जिला मुख्यालय के विभिन्न सरकारी कार्यालयों का ताबड़तोड़ दौरा किया। इस आकस्मिक निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह परखना था कि क्या अधिकारी और कर्मचारी अपने कार्यस्थल पर समयबद्ध तरीके से पहुँच रहे हैं या नहीं और सरकारी कामकाज सुचारु रूप से संचालित हो रहा है या नहीं। निरीक्षण के दौरान कई विभागों में कर्मचारियों की कुर्सियाँ खाली मिलीं, जिससे यह साफ हो गया कि वे तय समय पर कार्यालय पहुँचे ही नहीं थे।
इन पाँच प्रमुख विभागों का किया गया निरीक्षण
कलेक्टर द्वारा जिन पाँच प्रमुख कार्यालयों की जाँच की गई, उनमें निम्नलिखित विभाग शामिल थे:
जिला पंचायत कार्यालय
आजीविका मिशन का कार्यालय
ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) विभाग
जनजाति कार्य विभाग
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय
इन सभी विभागों में कलेक्टर ने स्वयं उपस्थिति पंजी (अटेंडेंस रजिस्टर) की गहन जाँच की और मौके पर मौजूद कर्मचारियों की संख्या का मिलान किया। इस जाँच प्रक्रिया में कुल 48 लोग ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए।
टीएल बैठक में साझा किए गए चौंकाने वाले आँकड़े
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने दोपहर के वक्त आयोजित टीएल (टाइम लिमिट) समीक्षा बैठक के दौरान इस पूरी कार्रवाई की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की। उन्होंने बताया कि अनुपस्थित पाए गए कुल 48 कर्मचारियों में सबसे बड़ी संख्या जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की थी, जहाँ से अकेले 19 अधिकारी-कर्मचारी अपनी ड्यूटी से नदारद मिले। इसके अलावा जिला पंचायत से 13, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा से 7, आजीविका मिशन से 5 और जनजाति कार्य विभाग से 4 अधिकारी-कर्मचारी बिना किसी सूचना के गायब पाए गए।
इनमें केवल निचले स्तर के कर्मी ही नहीं, बल्कि कई बड़े और जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन यंत्री (EE), जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) स्वयं, आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक और आजीविका मिशन के डीपीएम (DPM) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर बैठे अधिकारी भी अपने दफ्तरों से नदारद मिले। कलेक्टर ने इन वरिष्ठ अधिकारियों की गैर-हाजिरी को बेहद गंभीरता से लिया है, क्योंकि उन पर अपने अधीनस्थों के लिए अनुशासन की मिसाल कायम करने की जिम्मेदारी होती है।
भविष्य में भी जारी रहेंगी ऐसी सख्त कार्रवाई
कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि सरकारी कामकाज में किसी भी तरह की हीला-हवाली या लापरवाही को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शासकीय कर्मचारियों का यह प्राथमिक दायित्व है कि वे समय पर कार्यालय पहुँचकर आम नागरिकों के काम समय पर निपटाएँ, ताकि जनता को परेशानियों का सामना न करना पड़े। जिला प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से जिले के तमाम सरकारी दफ्तरों में हड़कंप मच गया है और कर्मचारियों में कड़ा संदेश गया है।
