गृह क्लेश और कंगाली का कारण तो नहीं घर का आंगन? जानें वास्तुशास्त्र के ये अहम नियम

घर और मकान के निर्माण के दौरान वास्तुशास्त्र का विशेष ख्याल रखना चाहिए. वास्तुशास्त्र में घर के किचन, बेडरूम, बाथरूम और आंगन सहित अन्य चीजों के लिए जगह और दिशा तय किए गए हैं. यदि ये चीजें गलत दिशा या स्थान पर हों तो घर में हमेशा परेशानियां आती हैं. बेडरूम और किचन की तरह वास्तुशास्त्र में घर के आंगन का भी विशेष महत्व है. घर का आंगन यदि ठीक स्थान पर हो तो आपको धन, वैभव और संतान की प्राप्ति होती है. वहीं यदि इसमें कुछ गड़बड़ियां हों तो घर का सुख-चैन सबकुछ छीन जाता है.
काशी के जाने-माने वास्तुशास्त्री पंडित संजय उपाध्याय ने बताया कि घर का आंगन हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए. इससे बीमारियां घर से दूर चली जाती हैं. वहीं यदि आंगन उबड़-खाबड़ हो तो अनजान आफत हमेशा उस घर में आती है. आंगन के निर्माण के समय हमेशा इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि आंगन के बीच का हिस्सा जमीन के अन्य भाग से नीचे हो. यदि यह स्थान ऊंचा होगा तो इससे आपको संतान की हानि होगी.
इन गलतियों से बचें
इसके अलावा पितृदोष, गृह क्लेश, जीवन में अलग-अलग तरह की बाधाएं भी उत्पन्न होंगी. साथ ही घर में कंगाली आएगी और माता लक्ष्मी भी रूठकर उल्टे पांव चली जाएंगी. वास्तुशास्त्र के अनुसार आंगन हमेशा घर के मध्य भाग में होना चाहिए. वास्तुशास्त्र में आंगन के स्थान को मनुष्य के शरीर की नाभि बताया गया है. आंगन घर का ब्रह्म स्थान होता है. इसलिए इस जगह पर भारी सामानों को भूलकर भी नहीं रखना चाहिए.
फ्लैट में भी बना सकते हैं आंगन
वैसे तो वर्तमान समय में बड़े शहरों में फ्लैट सिस्टम का कल्चर तेजी से बढ़ा है. अपने फ्लैट में भी आप वास्तुशास्त्री की मदद से आंगन के स्थान को निर्धारित कर वास्तुशास्त्र में तय नियमों का पालन कर सकते हैं. इससे भी आपके घर में सुख-समृद्धि का वास होगा.
