दुश्मनों की बढ़ेगी चिंता, भारत का ‘काल’ ड्रोन जल्द सेना में होगा शामिल

नई दिल्ली। रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को एक और बड़ी मजबूती मिलने जा रही है। एक हजार किलोमीटर की दूरी तक जाकर दुश्मन के ठिकाने को तबाह करने वाला स्वदेशी लंबी दूरी का 'वन-वे अटैक' सुसाइड (आत्मघाती) ड्रोन 'काल' जल्द ही भारतीय सेना का हिस्सा बनेगा। राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों से लॉन्च होकर अफगानिस्तान के भीतर तक सटीक निशाना साधने में सक्षम यह ड्रोन गहरे रणनीतिक हमलों के लिए तैयार किया गया है। इसे बनाने वाली कंपनी 'आईजी डिफेंस' के अनुसार, यह तकनीक रूस के 'जेरॉन-2' और अमेरिका के 'ल्यूकस' ड्रोन की श्रेणी में आती है।
कम लागत और अत्याधुनिक नेविगेशन तकनीक से लैस
आधुनिक युद्धक्षेत्र में कम लागत वाले मानवरहित हथियारों की महत्ता को देखते हुए इस ड्रोन का निर्माण किया गया है। कंपनी के सीईओ के मुताबिक, आने वाले समय में स्वायत्त और लंबी दूरी की प्रणालियां ही युद्ध का रुख तय करेंगी। 'काल' ड्रोन में उन्नत नेविगेशन सूट, मल्टी-बैंड जीएनएसएस और एन्क्रिप्टेड डाटालिंक का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे दुश्मन के रडार और इलेक्ट्रॉनिक जैमर के प्रभाव से मुक्त रहकर सुरक्षित उड़ान भरने में सक्षम बनाते हैं।
5,000 मीटर की ऊंचाई और 50 किलो विस्फोटक ले जाने की क्षमता
तकनीकी विशेषताओं की बात करें तो 1,000 किलोमीटर रेंज वाला यह स्वदेशी ड्रोन लगातार 7 से 8 घंटे तक हवा में मंडरा सकता है। यह 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से 5,000 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम है और अपने साथ 50 किलोग्राम तक विस्फोटक ले जा सकता है। हाई-रेजोल्यूशन और थर्मल कैमरों से लैस इस ड्रोन के निर्यात को लेकर कुछ मित्र देशों से भी वार्ता चल रही है, जिसके लिए अंतिम मंजूरी सरकार के स्तर पर ली जाएगी।
