इस माह पड़ रहे ये प्रमुख व्रत , त्यौहार

आगामी अगस्त 2026 का महीना हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए आस्था और उमंग से भरा रहने वाला है। यह महीना कई महत्वपूर्ण त्योहारों और व्रतों का संगम लेकर आ रहा है, जो भक्तों को अपनी धार्मिक परंपराओं से जुड़ने और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने का अवसर प्रदान करेंगे। श्रावण मास के प्रमुख पर्वों के साथ-साथ कई अन्य महत्वपूर्ण तिथियां भी इस महीने में पड़ रही हैं, जिनका अपना विशेष महत्व है।
महीने की शुरुआत कामिका एकादशी से होगी, जो 9 अगस्त, रविवार को मनाई जाएगी। श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने का विधान है। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और अपार पुण्य की प्राप्ति होती है।
इसके बाद 11 अगस्त, मंगलवार को सावन शिवरात्रि का महापर्व मनाया जाएगा। सावन के महीने में पड़ने वाली शिवरात्रि का शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व है। इस दिन भोलेनाथ की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है और कांवड़ यात्रा भी इसी दिन समाप्त होती है। ऐसी मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक शिवजी की पूजा करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि के संयोग बनते हैं।
ठीक अगले ही दिन, 12 अगस्त, बुधवार को हरियाली अमावस्या का पर्व है। सावन मास के कृष्ण पक्ष की यह अमावस्या पितरों को समर्पित मानी जाती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने के बाद दान और पितृकर्म किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
मध्य अगस्त में, 15 अगस्त, शनिवार को हरियाली तीज का व्रत मनाया जाएगा। यह व्रत सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं, जबकि कन्याएं अच्छे वर की कामना से इसे करती हैं। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है।
इसके दो दिन बाद, 17 अगस्त, सोमवार को दो महत्वपूर्ण त्योहार एक साथ पड़ रहे हैं। इनमें से पहला है नाग पंचमी, जो श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर मनाई जाती है। हिंदू धर्म में नाग पंचमी का बहुत विशेष महत्व बताया गया है, और इस दिन नाग देवता की पूजा का विधान है, जिससे जातक को शिवजी की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। इसी दिन श्री कल्कि जयंती भी मनाई जाएगी। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाने वाली कल्कि जयंती, भगवान विष्णु के दसवें अवतार श्री कल्कि जी के प्राकट्य का प्रतीक है। कल्कि पुराण के अनुसार, भगवान कल्कि का प्राकट्य सावन मास के शुक्ल पक्ष की संध्या व्यापिनी तिथि में होगा।
रक्षाबंधन
वर्ष 2026 में रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार 28 अगस्त (शुक्रवार) को मनाया जाएगा। राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5:57 से सुबह 9:48 तक है। सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह 9:08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी
संक्षेप में, अगस्त 2026 का महीना धार्मिक गतिविधियों और सांस्कृतिक उत्सवों से परिपूर्ण रहेगा, जो भक्तों को आध्यात्मिकता के मार्ग पर आगे बढ़ने और ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त करने का अनमोल अवसर प्रदान करेगा।
