सरकार की लापरवाही, स्मार्ट सिटी रिव्यू में रायपुर को लग सकता है ये बड़ा झटका

स्मार्ट सिटी रायपुर के कामों का रिव्यू (Review) लेने के लिए जल्द ही केन्द्र की टीम (Central Team) का दौरा होने वाला है. लेकिन सरकार (Government) बदलने के बाद स्मार्ट सिटी (Smart City) के ज्यादातर प्रोजेक्ट (Project) टप्प पड़े हुए है. और जो प्रोजेक्ट पिछली सरकार ने शुरू किए थे वो भी किसी काम के नहीं रहे. केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय (Union Ministry of Urban Development) और मिशन के आला अधिकारियों का जल्द ही रायपुर (Raipur) दौरा होने वाला है, जिसमें केन्द्र की टीम जमीनी स्तर (Ground Level) पर कामों की पड़ताल करेगी. साथ ही ये भी जांचेगी कि ये काम शहरवासियों की सुविधा के लिए कितने जरूरी है और अब तक हुए कामों में आखिर जनता को कितनी सुविधा मिली. इधर स्मार्ट सिटी के एमडी शिव अनंत तायल का कहना है कि वे रिव्यू(Review) के लिए तैयार है.
एक नजर इन प्रोजेक्ट्स पर जिनमे करोड़ों खर्च करने के बाद भी कोई उपयोग नहीं हो रहा है:
प्रोजेक्ट 1 . साइकिल ट्रैक – रायपुर को स्मार्ट (Smart) बनाने के लिए स्मार्ट सिटी कंपनी (Smart city company) ने सवा करोड़ की लागत से सायकल ट्रैक (Cycle track) जरूर तैयार कर लिया लेकिन इसके बावजूद इस ट्रैक का इस्तेमाल पार्किंग और ठेले लगाने के लिए किया जा रहा है. भोपाल, गुजरात और चंडीगढ़ की तर्ज पर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत रायपुर में राज्य का पहला साइकिल ट्रैक बनाया तो गया है लेकिन लोगों को इसके उपयोग की जानकारी देने और जागरूक करने के लिए अफसरों ने कोई ध्यान नहीं दिया. नतीजा ये निकला कि नगर घड़ी चौक से लेकर गौरव पथ तक लाल रंग से बने इस सायकल ट्रैक पर सड़क किनारे फलों के दुकान लगाने वाले और कार पार्किंग के लिए लोग इसका इस्तेमाल कर रहे है.
प्रोजेक्ट 2 . अंर्राज्यीय बस स्टैंड – राजधानी के रावणभाठा में संचालनालय नगरीय प्रशासन (Urban administration) और विकास यांत्रिकी प्रकोष्ठ ने बस अड्डे (Bus stand) का निर्माण 49.21 करोड़ की लागत से कराया है. बस अड्डे का निर्माण तो हो गया है लेकिन शिफ्टिंग (Shifting) पिछले कई महीनों से अटकी हुई है.
प्रोजेक्ट 3 – आईटीएमएस – स्मार्ट और सिक्योर सिटी के लिए यहां 158 करोड़ रुपए की लागत से तैयार आईटीएमएस (इंटेलीजेंट ट्रैफिक एंड मैनेजमेंट सिस्टम) और टीईएस (ट्रैफिक इंफोर्समेंट सिस्टम) एसएस (सर्विलांस सिस्टम) और आईसीसीसी (इंटीग्रेटेड कमांड और कंट्रोल सेंटर) तैयार किया गया है जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) कर चुके है, लेकिन इस सिस्टम का भी उपयोग मैन पावर (Man power) की कमी के चलते नहीं हो पा रहा है.
प्रोजेक्ट 4 – स्मार्ट रोड – रायपुर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत स्मार्ट रोड (Smart Road) का प्लान केवल कागज़ों में ही सिमट कर रह गया है. ढाई साल पहले तैयार हुआ ये प्रोजेक्ट भी हवा-हवाई साबित हुआ. अब तक राजधानी में एक इंच भी स्मार्ट सड़क नहीं बन पाई है. प्रोजेक्ट के मुताबिक पहले चरण में 5 किलोमीटर तक की स्मार्ट सड़क पहले बननी थी जिसमें चौड़ाई के हिसाब से सड़कों में फुटपाथ, साइकल ट्रैक, सीवरेज सिस्टम, बिजली के तारों को अंडर ग्राउंड करना, फ्री वाई-फाई और सीसीटीवी कैमरे लगने थे. यहां ये बताना भी जरूरी है कि साल 2017 में ही स्मार्ट रोड का प्लान तैयार कर लिया गया था जिसे लेकर टेंडर भी जारी किया गया था ठेका कंपनी ने 121 करोड़ की निविदा भरी थी. लेकिन प्रोजेक्ट(Project) के लिए 108 करोड़ ही स्वीकार किए गए थे. लिहाजा काम कुछ भी नहीं हुआ. इतना जरूर है की प्रोजेक्ट का बजट अब बढ़ गया है. पहले प्रोजेक्ट 108 करोड़ का था लेकिन अब ये 392 करोड़ का हो गया है.
कांग्रेस ने ठहराया सरकार को जिम्मेदार:
शहर के लोगों को स्मार्ट सिटी की सुविधा देने के लिए अब तक 600 करोड़ से ज्यादा खर्च कर दिए है, लेकिन अभी भी ज्यादातर काम अधूरे है. इससे लोगों को शासन की योजना का लाभ नहीं मिल रहा है. वहीं चालू किए गए प्रोजेक्ट की लागत भी बढ़ रही है. कामों की धीमी चाल से शहर में अव्यवस्थाएं भी फैली है. शहर के इस हालात के लिए उपनेता प्रतिपक्ष ने कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. उपनेता प्रतिपक्ष रमेश सिंह ठाकुर का कहना है कि स्मार्ट सिटी को लेकर कई काम तो शुरू किया गया लेकिन उसे पूरा करने की ओर सरकरा ने ध्यान नहीं दिया. इस वजह से ये स्थिति बनी है.
महापौर ने कही ये बात
वहीं इन आरोपों को लेकर महापौर प्रमोद दूबे का कहना है कि ये इसमें कंसल्टेंट कंपनी की ग़लती है. कंपनी की नियुक्त पिछली सरकार में हुई थी. मेयर ने केन्द्र की रिव्यू टीम के सामने इन बातों को रखने की बात कही है.
