तीज के रंग में रंगते हैं ये शहर, जयपुर से लेकर इन जगहों पर लगता है शानदार मेला

हरियाली तीज का पावन पर्व इस साल 15 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। सावन के महीने में मनाए जाने वाले इस त्योहार की पहचान हाथों में रची मेहंदी, हरी चूड़ियों, पारंपरिक झूलों, लोकगीतों और भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा से जुड़ी है। उत्तर और पश्चिम भारत में इस पर्व को बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर कई प्रमुख शहरों में भव्य मेलों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और शोभायात्राओं का आयोजन किया जाता है, जो सैलानियों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र होते हैं।
जयपुर: शाही सवारी और भव्य महोत्सव
हरियाली तीज का सबसे चर्चित और भव्य आयोजन जयपुर में देखने को मिलता है। यहां निकलने वाली तीज माता की शाही सवारी ऐतिहासिक सिटी पैलेस क्षेत्र से शुरू होकर त्रिपोलिया बाजार और छोटी चौपड़ जैसे पुराने शहर के मुख्य मार्गों से गुजरती है। राजस्थान पर्यटन विभाग के अनुसार, इस शाही जुलूस में सजे हुए हाथी-ऊंट, घोड़े, पारंपरिक पालकियां, रथ, बैलगाड़ियां और बड़ी संख्या में लोक कलाकार शामिल होते हैं।
जयपुर के इस आयोजन की मुख्य विशेषताएं:
तीज माता की भव्य शाही सवारी
पारंपरिक राजस्थानी लोक नृत्य और संगीत
सजे-धजे हाथी और ऊंट
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और रंग-बिरंगी झांकियां
दिल्ली-एनसीआर के तीज मेले
राजधानी क्षेत्र यानी नई दिल्ली और गुरुग्राम में भी हरियाली तीज के मौके पर विशेष सांस्कृतिक और शॉपिंग मेलों का आयोजन किया जाता है। दिल्ली के आईएनए और पीतमपुरा जैसे इलाकों में हर साल तीज महोत्सव सजता है, जहां महिलाओं के लिए राजस्थानी हस्तशिल्प, पारंपरिक झूले, मेहंदी के स्टॉल और सावन की प्रसिद्ध मिठाई 'घेवर' मुख्य आकर्षण होती है। इसके अलावा गुरुग्राम के सोहना क्षेत्र में भी पारंपरिक तीज मेले का आयोजन होता है, जहां स्थानीय लोक संगीत और नृत्य की धूम रहती है।
बूंदी: प्रसिद्ध कजली तीज का उत्सव
राजस्थान के बूंदी जिले में प्रसिद्ध कजली तीज मेले का आयोजन किया जाता है। हालांकि, कजली तीज का पर्व हरियाली तीज से थोड़ा अलग होता है, लेकिन यहां लगने वाला यह मेला एक सप्ताह से भी अधिक समय तक चलता है। हाड़ौती क्षेत्र की संस्कृति और परंपराओं से जुड़ा यह उत्सव देवी उमा की पूजा और भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए पूरे राज्य में अपनी एक अलग पहचान रखता है।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर और मंदिर
उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में सावन के पूरे महीने भर मेलों की रौनक देखने को मिलती है। हरियाली तीज के अवसर पर प्रदेश के कई शहरों में महिलाएं मंदिरों में पहुंचकर भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना करती हैं। प्रयागराज में भी तीज पर्व पर धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष विधान रहता है। इसके अलावा कानपुर के प्रसिद्ध परमट मंदिर, वाराणसी, विंध्याचल और मैहर (मध्य प्रदेश सीमा से लगे क्षेत्र) के मंदिरों के आसपास भी सावन के दौरान भव्य मेले सजते हैं, जो श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र होते हैं।
