गाजा में युद्ध खत्म करने को लेकर नेतन्याहू का रुख सख्त, हमास से हथियार छोड़ने को कहा

यरुशलम। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वरिष्ठ वार्ताकार और दामाद जेरेड कुश्नर ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एक अहम बैठक की। लगभग तीन घंटे तक चली इस मैराथन वार्ता के बावजूद गाजा पट्टी से इजरायली सशस्त्र बलों को वापस बुलाने के मुद्दे पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका।

सैन्य वापसी पर इजरायल का सख्त रुख

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक हमास पूरी तरह अपने शस्त्र नहीं डाल देता और गाजा का पूर्ण असैन्यीकरण सुनिश्चित नहीं हो जाता, तब तक सैनिकों की वापसी संभव नहीं है। राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि आगामी अक्टूबर में होने वाले आम चुनावों से पहले नेतन्याहू कोई भी ऐसा फैसला नहीं लेना चाहते जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति कमजोर दिखाई दे।

गाजा शांति योजना और क्षेत्रीय नेताओं की वार्ता

यह बैठक अमरीकी प्रशासन की गाजा शांति पहल को आगे बढ़ाने के लिए बुलाई गई थी, जिसमें ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और पूर्व यूएन अधिकारी निकोलाई मेलादेनोव ने भी भाग लिया। इससे पूर्व काहिरा में हमास नेता खलील अल-हय्या के साथ दो घंटे लंबी चर्चा हुई थी, जिसमें हमास ने सत्ता छोड़ने और हथियार सौंपने की बात तो स्वीकार की, लेकिन शर्त रखी कि इजरायल अपने सैन्य अभियान रोके और वर्तमान में अपने कब्जे वाले 60 प्रतिशत से अधिक गाजा क्षेत्र को खाली करे।

अरब देशों की आपत्ति और विवादित बयान

मिस्र, कतर और तुर्किए की उपस्थिति में हुई वार्ताओं के बीच सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, जार्डन, पाकिस्तान और इंडोनेशिया ने इजरायल के अड़ियल रवैये की कड़ी आलोचना की है। वहीं दूसरी ओर, इजरायल के अति-दक्षिणपंथी आंतरिक सुरक्षा मंत्री इत्मार बेन गिविर के गाजा में रोजाना दर्जनों मौतों को अंजाम देने संबंधी भड़काऊ बयान ने शांति प्रयासों के बीच विवाद खड़ा कर दिया है।

Leave a Reply