ग्रामीणों की आंखों के सामने गंडक में समाया स्कूल, बाढ़ ने उजाड़ दिए 109 परिवारों के आशियाने

मधुबनी (पश्चिम चंपारण): बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के मधुबनी अंतर्गत आने वाले रेवहिया गाँव में गंडक नदी का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। जिस स्कूल परिसर में कुछ दिन पहले तक छोटे-छोटे बच्चों की किलकारियां और पढ़ने की आवाजें गूंजती थीं, आज वहाँ गंडक नदी की उफनती और तेज धारा बह रही है। नदी का कटाव इतना भयानक है कि ग्रामीण अपनी आँखों के सामने अपने घरों और जमीनों को पानी में बहता हुआ देखने को विवश हैं। स्थिति यह है कि प्राथमिक विद्यालय उर्दही चिउरही पूरी तरह से नदी की धारा में समा चुका है, और यदि यही रफ्तार रही तो कई अन्य परिवारों के सामने खुले आसमान के नीचे रहने का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

तीन कमरों का स्कूल और बच्चों का भविष्य नदी में समाया

चिउरही पंचायत के रेवहिया गाँव में गंडक नदी लगातार भयानक कटाव कर रही है। नदी के तेज बहाव ने प्राथमिक विद्यालय उर्दही चिउरही को अपनी आगोश में ले लिया है। इस विद्यालय भवन में कुल तीन कमरे थे और यहाँ लगभग 80 बच्चों का नामांकन था। स्कूल के इस प्रकार नदी में विलीन हो जाने से नौनिहालों की पढ़ाई पर भी बड़ा संकट आ गया है।

मजबूरी में खुद घर तोड़कर सुरक्षित ठिकाना तलाश रहे लोग

नदी का कटाव अब रिहायशी इलाकों की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहा है। तटवर्ती जमीनें देखते ही देखते जलमग्न हो रही हैं। बढ़ते खतरे को भांपते हुए कई पीड़ित परिवार खुद ही अपने हाथों से अपने आशियानों को तोड़ने और कीमती सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने को मजबूर हैं। अब तक 15 से अधिक परिवार अपने घरों का मलबा और सामान ट्रैक्टर-ट्रॉली पर लादकर सड़क के किनारे या अन्य सुरक्षित जगहों पर नया ठिकाना तलाशने को विवश हो चुके हैं।

ग्रामीणों का दर्द और 109 परिवारों के घर नदी में विलीन

वर्षों की खून-पसीने की कमाई से खड़े किए गए घरों को खुद अपने हाथों से उजड़ते देखना ग्रामीणों के लिए बेहद पीड़ादायक है। स्थानीय ग्रामीण गोलू यादव, बरकत गद्दी, वीरेंद्र यादव, जमील अख्तर और नसीम अख्तर ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि गंडक नदी का यह कटाव उनके लिए कोई नई समस्या नहीं है, हर साल बरसात के मौसम में नदी का रुख गाँव की ओर मुड़ जाता है, लेकिन आज तक इसका कोई स्थायी और ठोस समाधान नहीं निकाला गया है।

ग्रामीणों के अनुसार, इस वर्ष रेवहिया क्षेत्र में कटाव शुरू होने के बाद से अब तक कुल 109 परिवारों के घर नदी में पूरी तरह समा चुके हैं। लोगों में इस बात का भारी डर है कि यदि समय रहते कटाव को रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में पूरा गाँव इसकी जद में आ जाएगा। ग्रामीणों ने यह भी याद दिलाया कि पिछले साल सिसई पंचायत के नरहवा में भी गंडक ने भारी तबाही मचाई थी, जहाँ करीब 150 लोगों के घर नदी में समा गए थे, बावजूद इसके प्रशासन द्वारा कोई पुख्ता कटावरोधी कार्य नहीं कराए गए।

अब पीड़ित ग्रामीण जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने और नदी के कटाव को रोकने के लिए युद्धस्तर पर ठोस उपाय करने की गुहार लगा रहे हैं, ताकि उनकी बाकी बची जिंदगी और घर सुरक्षित रह सकें।

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