नाबालिगों के जरिए वारदात कराने वाले आरोपी पर कसा शिकंजा, गैंग से जुड़े बच्चों की तलाश जारी

जबलपुर: जबलपुर में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने यात्रियों का सामान चुराने वाली एक शातिर नाबालिग चोर गैंग का पर्दाफाश करते हुए इसके मुख्य सरगना को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने 40 वर्षीय नितेश कुमार को हिरासत में लिया है, जो गरीब बच्चों को बहला-फुसलाकर ट्रेनों और स्टेशनों पर चोरी की वारदातों को अंजाम दिलवाता था। इस खुलासे से रेलवे सुरक्षा महकमे में भी हड़कंप मच गया है।

50 से 70 बच्चों की चलाता था गैंग

आरपीएफ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, आरोपी नितेश कुमार ने अपनी इस आपराधिक गैंग में 12 से 16 वर्ष की उम्र के लगभग 50 से 70 नाबालिग बच्चों को जोड़ रखा था। वह शहर की गरीब बस्तियों (जैसे हनुमान ताल, मदार टेकरी, सिद्ध बाबा की पहाड़ी आदि) के बच्चों को निशाना बनाता था और उन्हें आसान तरीके से पैसे कमाने का लालच देकर अपने जाल में फंसाता था।

वह इन बच्चों को करीब दो महीने तक बाकायदा चोरी करने, भीड़भाड़ में छिपने और पकड़े जाने पर बचने के तरीके सिखाता था। इसके बाद उन्हें रेलवे प्लेटफॉर्म, चलती ट्रेनों और वेटिंग रूम्स में चोरी करने के लिए भेज दिया जाता था। हैरान करने वाली बात यह है कि जैसे ही कोई बच्चा 18 वर्ष का होता था, वह उसे अपनी गैंग से बाहर कर देता था ताकि कानूनी दांव-पेच से बचा जा सके।

यूट्यूब से लेता था चोरी और ट्रेनिंग के आइडिया

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि नाबालिग बच्चों की गैंग तैयार करने और उन्हें चोरी के तरीके सिखाने का नापाक आइडिया नितेश को यूट्यूब से मिला था। वह ऑनलाइन वीडियो देखकर चोरी करने के नए-नए तरीके सीखता और फिर वैसी ही ट्रेनिंग अपने गैंग के बच्चों को देता था।

खुद मास्टरमाइंड नितेश भी एक बेहद शातिर चोर है और लंबे समय से ट्रेनों में वारदातों को अंजाम देता आ रहा था। करीब दो साल पहले एक दुर्घटना में पैर खराब होने के बाद उसने प्रत्यक्ष रूप से चोरी करना कम कर दिया और बच्चों को अपना मोहरा बनाना शुरू कर दिया। स्टेशन पर लगभग 10 साल तक वेंडर का काम करने के कारण उसे रेलवे की हर गतिविधि की गहरी जानकारी थी, जिसका इस्तेमाल वह बच्चों को प्रशिक्षित करने में करता था।

कई थानों में दर्ज हैं आपराधिक मामले

आरपीएफ थाना प्रभारी राजीव खरब के अनुसार, आरोपी नितेश कुमार के खिलाफ पूर्व में तीन लूट, आठ चोरी और आर्म्स एक्ट के तहत लगभग 15 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं। जिला पुलिस और आरपीएफ ने उसे कई बार गिरफ्तार भी किया था, लेकिन जमानत पर बाहर आने के बाद वह फिर से इसी अवैध धंधे में लग जाता था।

दो साल पहले पैर खराब होने के कुछ समय तक वह स्टेशन पर भीख भी मांगता रहा और बाद में उसने बच्चों की यह आपराधिक सिंडिकेट खड़ी कर ली। फिलहाल, आरपीएफ ने उसे गिरफ्तार कर लिया है और उसकी इस गैंग से जुड़े अन्य नाबालिगों की तलाश तथा उनके पुनर्वास के संबंध में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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