मिड-डे मील के बाद 38 बच्चों को उल्टी-दस्त की शिकायत, इंदौर में जांच शुरू

इंदौर: सांवेर तहसील के सिंहासा गांव स्थित शासकीय माध्यमिक स्कूल में शनिवार को मिड-डे मील का खाना खाने के बाद 38 बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। दोपहर में परोसी गई कढ़ी-चावल खाने के कुछ ही देर बाद विद्यार्थियों को पेट दर्द, सिरदर्द और चक्कर आने की शिकायत होने लगी। देखते ही देखते बीमार बच्चों की संख्या बढ़ने पर स्कूल परिसर और गांव में हड़कंप मच गया। शिक्षकों और ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए निजी वाहनों की मदद से सभी बच्चों को इंदौर के अरविंदो अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार किया गया। डॉक्टरों के मुताबिक फिलहाल सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं।

कढ़ी का स्वाद खराब होने का बच्चों ने लगाया आरोप

अस्पताल में भर्ती छात्राओं ने बताया कि रोज की तुलना में शनिवार को परोसी गई कढ़ी का स्वाद काफी अलग और अजीब था। आठवीं कक्षा की छात्राओं के अनुसार, कढ़ी खाने के तुरंत बाद ही उनके पेट में तेज दर्द और ऐंठन शुरू हो गई। बच्चों के इस बयान के बाद मिड-डे मील की गुणवत्ता और भोजन पकाने में बरती गई लापरवाही पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

खाद्य विभाग ने जांच के लिए लिए भोजन के सैंपल

घटना की सूचना मिलते ही खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम स्कूल पहुंची और जांच शुरू की। अधिकारियों ने मौके से कढ़ी और चावल के सैंपल सील कर प्रयोगशाला भेज दिए हैं। कढ़ी तैयार करने में इस्तेमाल किए गए दही और छाछ की गुणवत्ता की विशेष रूप से जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भोजन में किसी जहरीले या दूषित पदार्थ की मिलावट तो नहीं थी।

अभिभावकों ने जताई एक्सपायरी सामग्री और दूषित पानी पर चिंता

बच्चों के बीमार होने से आक्रोशित पालकों ने स्कूल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं। परिजनों का दावा है कि इससे पहले भी भोजन में लापरवाही के मामले सामने आ चुके हैं। इसके अलावा स्कूल में पीने के पानी के लिए आरओ (RO) सिस्टम नहीं है। बच्चे बोरिंग का सीधा पानी पीने को मजबूर हैं। पालकों और ग्रामीणों ने प्रशासन से स्कूल में स्वच्छ पेयजल की तत्काल व्यवस्था करने की मांग की है।

स्वास्थ्य विभाग दो दिन तक रखेगा बच्चों पर नजर

अस्पताल से प्राथमिक इलाज के बाद बच्चों की स्थिति सामान्य होने पर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव हासानी ने बताया कि एहतियात के तौर पर स्वास्थ्य विभाग की टीम अगले दो दिनों तक घर-घर जाकर सभी बच्चों की सेहत की निगरानी करेगी, ताकि किसी भी बच्चे में पुनः उल्टी, दस्त या बुखार के लक्षण दिखने पर तुरंत उपचार दिया जा सके।

महिला कांग्रेस ने सरकार की व्यवस्थाओं को घेरा

घटना की जानकारी मिलने के बाद महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीना बौरासी भी बच्चों का हाल जानने अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने बच्चों से बातचीत करने के बाद प्रदेश सरकार और स्कूल प्रशासन को आड़े हाथों लिया। रीना बौरासी ने कहा कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को घटिया स्तर का खाना और दूषित पानी दिया जा रहा है, जिससे मासूमों की जान जोखिम में पड़ रही है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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