कुछ देर की बारिश और जलमग्न हुआ बैरियर चौराहा, निकासी का इंतजाम फेल

मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में मानसून की शुरुआत होते ही प्रशासनिक व्यवस्थाओं और जलनिकासी के दावों की हवा निकल गई है। शहर के सबसे व्यस्ततम बैरियर चौराहे पर हल्की बारिश के बाद ही भारी जलभराव हो गया, जिससे पूरा चौराहा किसी तालाब जैसा दिखाई देने लगा। नेशनल हाईवे-552 और नेशनल हाईवे-44 के इस प्रमुख जंक्शन पर पानी भरने के कारण वाहन चालकों और राहगीरों को आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग पर बिगड़े हालात
दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों को जोड़ने वाले बैरियर चौराहे पर जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने से थोड़ी सी बारिश में ही सड़कें पानी में डूब गईं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर साल बरसात के मौसम में यहां यही स्थिति बनती है, लेकिन प्रशासन की तरफ से अब तक कोई ठोस व स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। पहली ही बारिश में व्यवस्थाएं ध्वस्त होने से जिम्मेदार विभागों की पूर्व तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पहले जाम और अब जलभराव की दोहरी मार
गौरतलब है कि यह बैरियर चौराहा पहले भी यातायात प्रबंधन में नाकामी और लंबे जाम को लेकर सुर्खियों में रहा है। इससे पहले मार्च 2026 में भी एनएच-552 और एनएच-44 पर बैरियर चौराहे से मुरैनागांव तक घंटों लंबा जाम लगा था। अब जलभराव की समस्या ने स्थानीय लोगों और यात्रियों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है।
प्रशासनिक उदासीनता पर उठे सवाल
बारिश के बाद पैदा हुए इन हालातों ने स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि अधिकारी सिर्फ कागजों और एसी कमरों तक सीमित हैं, जबकि धरातल पर स्थितियां बदतर बनी हुई हैं। अब जनता यही सवाल पूछ रही है कि आखिर बैरियर चौराहे पर जलभराव की इस पुरानी समस्या का स्थायी समाधान कब निकाला जाएगा और आम लोगों को इस परेशानी से कब राहत मिलेगी।
