‘संसद के फैसले का इंतजार नहीं’, डिजिटल अरेस्ट पर CJI सूर्यकांत ने साफ किया रुख

नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा है कि भारतीय न्यायपालिका 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी तेजी से उभरती साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है और संसद द्वारा नए कानून बनाए जाने की प्रतीक्षा नहीं कर रही है। 43वें इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन इकोनॉमिक क्राइम के समापन सत्र को संबोधित करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने बताया कि बदलती तकनीक के साथ आर्थिक अपराधों के स्वरूप में तेजी से बदलाव आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में जहां साइबर ठग पुलिस, सीबीआई या न्यायिक अधिकारियों का रूप धारण कर वीडियो कॉल के जरिए डराते-धमकाते हैं, न्यायपालिका ने स्वतः संज्ञान लेकर केंद्र और राज्य सरकारों को व्यापक आकलन के कड़े निर्देश दिए हैं।

मनी लॉन्ड्रिंग पर वैश्विक आंकड़ों का हवाला और कौटिल्य का उल्लेख

मनी लॉन्ड्रिंग को पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चुनौती बताते हुए सीजेआई ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा साझा किया। उन्होंने कहा कि यदि वैश्विक स्तर पर अवैध लेन-देन के अनुमान सही हैं, तो प्रतिवर्ष इतनी बड़ी राशि का अवैध प्रवाह होता है जिससे दुनिया की करीब आठ अरब आबादी में से हर एक व्यक्ति के लिए एक लैपटॉप खरीदा जा सकता है। इसके बावजूद कुल अवैध धन में से 1 प्रतिशत से भी कम बरामद हो पाता है। इस संदर्भ में उन्होंने कौटिल्य के अर्थशास्त्र का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह जीभ की नोक पर रखे शहद या विष का स्वाद न लेना कठिन है, उसी तरह सरकारी राजस्व संभालने वाले अधिकारी के लिए भ्रष्टाचार से अछूता रहना चुनौतीपूर्ण रहा है।

गिरफ्तारी के नियम और आरोपी के संवैधानिक अधिकार

प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के कथित दुरुपयोग और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर बोलते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका ने मानवाधिकारों की रक्षा के लिए समय-समय पर प्रभावी हस्तक्षेप किया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले का उल्लेख किया जिसमें आरोपी को गिरफ्तारी के आधार केवल मौखिक रूप से सुनाने के बजाय लिखित रूप में देना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बनाम सीबीआई मामले का उदाहरण देते हुए उन्होंने दोहराया कि मुकदमे से पहले अत्यधिक समय तक हिरासत में रखना सजा का रूप नहीं ले सकता और जमानत ही सामान्य नियम होना चाहिए।

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