दुनिया बसाने के बाद भी नहीं क्यों नहीं होती ब्रह्मा जी की पूजा? ले डूबा पत्नी से खटपट

उत्तराखंड का बागेश्वर जिला धार्मिक और प्राकृतिक दृष्टि से अनूठा है. यहां कई ऐसे प्राचीन मंदिर और धार्मिक स्थल हैं, जिनसे पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. इन्हीं में से एक ब्रह्मा जी का मंदिर भी है. यह मंदिर सरयू और गोमती नदियों के पवित्र संगम के आसपास शांत और सुंदर वातावरण में स्थित है. मंदिर के आसपास के क्षेत्र को स्वर्ग वाटिका के नाम से भी जाना जाता है. यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति की सुंदरता भी देखने को मिलती है. लोकल 18 से बागेश्वर के वरिष्ठ शिक्षक हरीश दफौटी बताते हैं कि हिंदू धर्म में भगवान ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, ब्रह्मा जी ने ही संसार की रचना की. इसके बावजूद भगवान ब्रह्मा के मंदिर देश में बहुत कम हैं और उनकी पूजा भी अन्य प्रमुख देवताओं की तुलना में कम होती है. इसके पीछे अलग-अलग पुराणों और लोक मान्यताओं में कई कथाएं बताई गई हैं.

निकल गया मुहूर्त
सबसे प्रसिद्ध मान्यता राजस्थान के पुष्कर से जुड़ी है. कथा के अनुसार भगवान ब्रह्मा ने पुष्कर में एक यज्ञ का आयोजन किया. यज्ञ के लिए उनकी पत्नी सावित्री का समय पर पहुंचना जरूरी था, लेकिन उनके देर से पहुंचने के कारण यज्ञ का शुभ मुहूर्त निकलने लगा. यज्ञ को पूरा करने के लिए ब्रह्मा जी ने गायत्री से विवाह कर यज्ञ संपन्न किया. जब सावित्री को इसकी जानकारी मिली तो वह नाराज हो गई. मान्यता है कि उन्होंने ब्रह्मा जी को पृथ्वी पर व्यापक रूप से पूजा न मिलने का श्राप दिया. इसी कथा के कारण पुष्कर को भगवान ब्रह्मा की पूजा का प्रमुख स्थान माना जाता है.

असत्य बोलने पर नाराज
भगवान ब्रह्मा की पूजा कम होने को लेकर एक दूसरी पौराणिक कथा भी प्रचलित है. इसमें भगवान शिव और ब्रह्मा जी से जुड़ी कथा बताई जाती है. ब्रह्मा जी और विष्णु जी के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ. इसी दौरान ब्रह्मा जी द्वारा असत्य बोलने से भगवान शिव नाराज हुए और उन्हें पृथ्वी पर पूजा से वंचित होने का श्राप मिलने की कथा कही जाती है. इन कथाओं को पौराणिक मान्यताएं माना जाता है. इनके अलग-अलग संस्करण भी मिलते हैं.
संहार का देवता
धार्मिक परंपरा में ब्रह्मा जी को सृष्टि की रचना, भगवान विष्णु को पालन और भगवान शिव को संहार का देवता माना जाता है. बागेश्वर का ब्रह्मा मंदिर इसी धार्मिक आस्था के साथ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी खास है. सरयू और गोमती का संगम, आसपास का शांत वातावरण और स्वर्ग वाटिका का क्षेत्र इस स्थान को आध्यात्मिक दृष्टि से आकर्षक बनाता है. यह स्थल धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों के लिए भी खास है.

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