‘समुद्र मंथन’ योजना पर कांग्रेस ने खोला मोर्चा, सरकार से सार्वजनिक बहस की मांग

नई दिल्ली | मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सोमवार को केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘समुद्र मंथन’ राष्ट्रीय ऑफशोर खोज योजना पर कड़े सवाल खड़े करते हुए गंभीर आरोप लगाया है कि इस योजना के माध्यम से अदाणी समूह से जुड़ी कंपनी 'वेल स्पन एक्सप्लोरेशन लिमिटेड' (AWEL) को सीधा वित्तीय लाभ पहुँचाया जा रहा है। कांग्रेस ने इस योजना को तत्काल प्रभाव से रद्द करने या इसके लिए स्वीकृत 84,084 करोड़ रुपये की पूरी राशि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ONGC को सौंपे जाने की पुरजोर मांग की है। दूसरी ओर, सरकार का पक्ष है कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश की ऑफशोर ऊर्जा क्षमता का दोहन कर ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना, घरेलू स्तर पर तेल-गैस की खोज को बढ़ावा देना और हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में निवेश आकर्षित करना है। हालांकि, इस पूरे मामले पर सरकार या अदाणी समूह की तरफ से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अदाणी समूह की कंपनी को सीधा फायदा पहुँचाने का आरोप
पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस प्रवक्ता शक्तिसिंह गोहिल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट द्वारा पिछले माह मंजूर की गई ‘समुद्र मंथन’ योजना के पहले चरण के लिए 84,084 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट तय किया गया है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने एक ऐसा ढांचा तैयार किया है जिसके तहत इस योजना की आड़ में विशेष रूप से अदाणी समूह की कंपनी को मदद मुहैया कराई जाएगी। गोहिल के मुताबिक, इस योजना के अंतर्गत सरकार गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज व अन्वेषण (ड्रिलिंग और सर्वे) से जुड़े खर्च का 50 प्रतिशत हिस्सा आर्थिक सहायता के रूप में वहन करेगी, जिससे निजी कंपनियों को बड़ा वित्तीय फायदा होगा।
AWEL में बहुलांश हिस्सेदारी और गहरे समुद्र में खोज का भारी खर्च
कांग्रेस नेता ने आंकड़े रखते हुए कहा कि वेल स्पन एक्सप्लोरेशन लिमिटेड (AWEL) में अदाणी समूह की लगभग 65 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसे उन्होंने वर्ष 2005 में अधिग्रहित किया था, जबकि शेष 35 प्रतिशत हिस्सेदारी ‘वेल स्पन ग्रुप’ के पास है। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘समुद्र मंथन’ योजना के तहत भारत सरकार गहरे समुद्र में कुओं की ड्रिलिंग, 2D और 3D सिस्मिक सर्वे, एआई आधारित डेटा री-प्रोसेसिंग और ऑफशोर इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास जैसी सभी व्यावसायिक गतिविधियों की आधी लागत उठाएगी।
गोहिल के अनुसार, गहरे समुद्र में केवल एक कुएं की खोज पर औसतन 1,100 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आता है। AWEL के पास मुंबई ऑफशोर बेसिन के B-9 क्लस्टर, MB-OSN-2005/2 ब्लॉक, तापी-दमन और कच्छ क्षेत्रों में खोज करने के अधिकार हैं और कंपनी ने जल्द ही बड़े पैमाने पर काम शुरू करने की घोषणा की है।
ONGC को दरकिनार करने का आरोप और कांग्रेस की मांग
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब देश में सार्वजनिक क्षेत्र की ओएनजीसी (ONGC) जैसी दिग्गज और अनुभवी कंपनी दशकों से तेल और गैस की खोज का कार्य कर रही है, तो इस राष्ट्रीय मिशन में उसे मुख्य भूमिका क्यों नहीं दी जा रही है। पार्टी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार सिर्फ एक निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुँचाने के लिए अपनी ही सार्वजनिक कंपनी के हितों से समझौता कर रही है।
कांग्रेस ने दो टूक मांग की है कि या तो ‘समुद्र मंथन’ योजना को पूरी तरह से रद्द किया जाए या फिर इसके लिए आवंटित 84,084 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि ONGC को दी जाए, ताकि रोजगार के नए अवसर सृजित हो सकें और देश में तेल-गैस की खोज का काम पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ सके।
क्या है 'समुद्र मंथन' योजना और सरकार का आधिकारिक पक्ष?
विदित हो कि केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित ‘समुद्र मंथन’ (राष्ट्रीय ऑफशोर खोज योजना) पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की एक प्रमुख केंद्रीय योजना है, जिसे वित्त वर्ष 2030-31 तक चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना है।
इस योजना के बचाव में सरकार की ओर से जारी आधिकारिक वक्तव्य में कहा गया है कि यह पहल प्रधानमंत्री के उस विजन को मूर्तरूप देती है, जिसे उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश की विशाल ऑफशोर ऊर्जा क्षमता का भरपूर उपयोग करने के लिए रेखांकित किया था। सरकार के अनुसार, यह योजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करने, घरेलू उत्पादन में तेजी लाने और 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने की दिशा में एक बेहद अहम कदम है।
