सुप्रीम कोर्ट की दो टूक- लॉ स्टूडेंट्स पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का हक विश्वविद्यालय को

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के पास कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों के आचरण को नियंत्रित करने या उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का कोई अधिकार नहीं है। अदालत ने कहा कि जब तक कोई छात्र औपचारिक रूप से अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत नहीं हो जाता, तब तक बीसीआई उस पर वकीलों से जुड़े पेशेवर नियम लागू नहीं कर सकती। छात्रों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार केवल संबंधित विश्वविद्यालय या शैक्षणिक संस्थान के पास है।

नेल्सर लॉ यूनिवर्सिटी विवाद से जुड़ा फैसला

यह फैसला हैदराबाद स्थित 'नेल्सर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ' (NALSAR) के छात्रों से जुड़े विवाद में आया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बीसीआई द्वारा जारी किए गए दोनों आदेशों को रद्द कर दिया। हालांकि, विवाद बढ़ता देख बीसीआई ने खुद भी ये आदेश कुछ ही घंटों के भीतर वापस ले लिए थे।

सीजेआई सूर्यकांत ने बीसीआई के दखल पर जताई नाराजगी

विवाद की शुरुआत 14 अगस्त को हुई थी, जब बीसीआई ने राज्य बार काउंसिलों को निर्देश जारी कर नेल्सर के 2026 बैच के छात्रों के रजिस्ट्रेशन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। छात्रों पर आरोप था कि उन्होंने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में सीजेआई सूर्यकांत के शामिल होने के प्रस्ताव के खिलाफ अभियान चलाया था। मामला कोर्ट पहुंचने पर सीजेआई सूर्यकांत ने बीसीआई के इस हस्तक्षेप पर सख्त नाराजगी जताते हुए इसे पूरी तरह अनुचित बताया था।

शैक्षणिक संस्थान ही तय करेंगे अनुशासन

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि लॉ छात्रों पर अनुशासनात्मक नियंत्रण पूरी तरह से विश्वविद्यालय का विषय है। कोई भी विश्वविद्यालय अपने तय नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत ही छात्रों के आचरण की जांच कर कार्रवाई करने के लिए अधिकृत है।

Leave a Reply