लाडली बहना योजना में नए रजिस्ट्रेशन शुरू होने का दावा फर्जी, वायरल मैसेज से रहें सावधान

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार की ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना’ को लेकर सोशल मीडिया पर एक फर्जी संदेश तेजी से फैल रहा है। इस संदेश में दावा किया जा रहा है कि योजना के अंतर्गत नए पंजीकरण और ई-केवाईसी (e-KYC) की प्रक्रिया फिर से प्रारंभ हो गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए इस दावे को पूरी तरह से भ्रामक और असत्य करार दिया है।

फर्जी मैसेज से भ्रम फैलाने की कोशिश

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस फर्जी संदेश में उन महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है, जिनकी किस्तें रुक गई हैं या जिनकी e-KYC की प्रक्रिया अधूरी रह गई थी। संदेश के साथ एक संदिग्ध लिंक भी साझा किया जा रहा है, जिस पर क्लिक करके नया फॉर्म भरने का दबाव बनाया जा रहा है। इस ऑनलाइन फॉर्म के माध्यम से महिलाओं से उनके महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, राशन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, फोटो और बैंक खाते की संवेदनशील जानकारियां मांगी जा रही हैं।

साइबर फ्रॉड का बड़ा खतरा

सुरक्षा विशेषज्ञों और साइबर विशेषज्ञों ने इस संबंध में महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की चेतावनी दी है। जानकारों का कहना है कि किसी भी अनजान या अनधिकृत लिंक पर अपनी निजी और बैंकिंग जानकारी साझा करने से बैंक खाता खाली हो सकता है। यह ठगों द्वारा पर्सनल डाटा चोरी करने की एक साजिश हो सकती है।

विभाग ने नहीं जारी की कोई नई गाइडलाइन

महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने साफ किया है कि सरकार की ओर से नए रजिस्ट्रेशन या e-KYC प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इस संबंध में न तो विभागीय मंत्री अदिति तटकरे की तरफ से और न ही मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्रियों की ओर से कोई आधिकारिक निर्देश दिए गए हैं।

सुरक्षित रहने के लिए विभाग की अपील

प्रशासन ने सभी लाभार्थी महिलाओं से आग्रह किया है कि वे ऐसे भ्रामक संदेशों और अनजान लिंक्स पर बिल्कुल भरोसा न करें। किसी भी स्थिति में अपनी निजी जानकारी, ओटीपी या दस्तावेज किसी अनधिकृत वेबसाइट पर साझा न करें। योजना से संबंधित सही और सटीक जानकारी प्राप्त करने के लिए केवल राज्य सरकार के आधिकारिक पोर्टल और प्रामाणिक माध्यमों का ही उपयोग करें। गौरतलब है कि इस योजना के तहत राज्य की पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 1,500 रुपये की वित्तीय सहायता डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है।

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